
बिच्छू डॉट कॉम। इस साल मानसून के कमजोर रहने की संभावना है। दो साल अच्छी बारिश होने के बाद इस साल सामान्य से कम बारिश होने के पूर्वानुमान ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि देश की लगभग आधी खेती मानसून पर निर्भर है। धान, दालों और तिलहन की बुवाई और पैदावार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को अपना पहला आधिकारिक अनुमान जारी किया। इसमें कहा गया है कि इस वर्ष देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान होने वाली वर्षा सामान्य से कम (लगभग सेंटीमीटर) रहने की संभावना है, जो भारत में मौसमी बारिश का दीर्घकालिक औसत (एलपीए-1971-2020) 87 सेंटीमीटर का लगभग 92 फीसदी है। एलपीए के 90 से 95 प्रतिशत के बीच की बारिश को सामान्य से कम माना जाता है।
