भारती की विधायकी बचाने कांग्रेस सक्रिय

  • विधानसभा से सदस्यता शून्य घोषित की गई

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
दतिया विधायक राजेन्द्र भारती की सदस्यता को बचाने के लिए कांग्रेस नेता सक्रिय हो गए हैं। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई होने की उम्मीद है। उधर भारती के मामले में प्रदेश नेताओं की उदासीनता पर एआईसीसी ने नाराजगी जताई है। गौरतलब है कि तकरीबन 27 साल पुराने एक मामले पर दिल्ली की एक अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए दतिया विधायक राजेन्द्र भारती की सदस्यता शून्य घोषित कर दी गई है। अपनी सजा के खिलाफ भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है। इस पर सोमवार या मंगलवार को सुनवाई हो सकती है। बताया गया है कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट एआईसीसी ने प्रदेश कांग्रेस से मांगी है। खबर है कि इस पूरे मामले पर जिस तरह से प्रदेश के नेताओं ने उदासीनता दिखाई, उसे लेकर पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व नाराज है। नेतृत्व का मानना है कि अदालत से सजा होने के बाद प्रदेश के नेताओं सक्रिय होना चाहिए था और सजा के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जबकि भाजपा भारती के दोषी करार होते ही सक्रिय हो गई और जैसे ही सजा हुई, उस रात्रि दतिया विधानसभा सीट रिक्त करा दी गई। बताया गया है कि दिल्ली के निर्देश के बाद इस पूरे मामले पर नजर रखने के लिए राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा और कपिल सिब्बल ऊपरी अदालत में भारती की ओर से पैरवी करेंगे। कांग्रेस और उनके नेताओं को उम्मीद है कि इस मामले में भारती को राहत मिल सकती है।
पहले भी बहाल हुई है सदस्यता
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के कई विधायकों की निचली अदालतों द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सदस्यता पहले भी रद्द हुई है, लेकिन उच्च न्यायालयों द्वारा सजा पर स्टे मिलने के बाद उनकी सदस्यता बहाल भी हुई है।
मुकेश मल्होत्रा: राजेन्द्र भारती की सदस्यता रद्द होने के कुछ दिनों पहले ही श्योपुर जिले के विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा शून्य घोषित कर दी गई थी, किन्तु मल्होत्रा ने अपनी सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की, जिसमें उन्हें न्यायालय ने राहत देते हुए विधायकी बहाल रखी। हालांकि उन्हें विधायक का वेतन व अन्य सुविधाएं नहीं मिलने और राज्यसभा में वोट नहीं दे पाने के निर्देश भी कोर्ट ने दिए हैं।
राहुल सिंह लोधी: टीकमगढ़ के खरगापुर से विधानसभा से विधायक रहे राहुल सिंह लोधी के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने राहुल लोधी के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी चंदा सिंह गौर ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर जबलपुर हाईकोर्ट ने सुनवाई के उपरांत राहुल लोधी का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया था। इस पर हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा ने अधिसूचना जारी कर राहुल लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी थी और खरगापुर विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया था। लेकिन राहुल के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद सुनवाई हुई और उनके खिलाफ हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिलने के बाद राहुल लोधी की सदस्यता बहाल कर दी गई।
प्रहलाद लोधी: इसी तरह का मामला पवई के तत्कालीन विधायक प्रहलाद लोधी का भी था। वर्ष 2019 में भाजपा विधायक लोधी को एमपी-एमएलए कोर्ट ने एक मामले में दो साल की सजा सुनाई थी। इसके आधार पर विधानसभा सचिवालय द्वारा उनकी सदस्यता को रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे फिर से विधायक बनें।
आशा रानी सिंह: छतरपुर जिले के बिजावर विधानसभा सीट के विधायक रही आशा रानी सिंह को एक नौकरानी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में 10 साल की सजा हुई थी। जिसके बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता को समाप्त कर दिया था। इस पर आशा रानी ने हाईकोर्ट में अपील की थी, किन्तु उन्हें सजा पर स्टे नहीं मिला था, जिससे उनकी सदस्यता नहीं बच सकी।

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