- गर्मी बढ़ने के साथ ही मप्र में शहरों से गांवों तक बूंद-बूंद के लिए जंग

गौरव चौहान
मप्र में बढ़ती गर्मी के साथ पेयजल संकट गहराता जा रहा है। शहरों से गांवों तक बूंद-बूंद के लिए जंग देखी जा सकती है। कहीं महिलाएं जान जोखिम में डालकर कुओं में उतर रही हैं तो कहीं लोग सूखी नदी-नालों में झिरिया खोदकर मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। कई गांवों में लोग किलोमीटरों दूर से पानी ला रहे हैं, जबकि कुछ जगह नलों से बदबूदार और कीड़ों वाला पानी सप्लाई हो रहा है। वहीं शहरों की स्थिति भी चिंताजनक है। प्रदेश के 40 फीसदी शहरों में रह रहे लोगों को पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। इसकी वजह यह है कि इन शहरों में रोजाना जलापूर्ति नहीं की जा रही है।
मप्र में गर्मी की दस्तक के साथ ही जल संकट गहराने लगता है। इस बार भी वही स्थिति नजर आ रही है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है पेयजल का संकट बढ़ते जा रहा है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 40 फीसदी शहरों में अब रोजाना जलापूर्ति पर ब्रेक लग गया है। इनमें से दस शहर ऐसे हैं जहां हर दो दिन और दो शहरों में तीन दिन के अंतराल पर आपूर्ति की जा रही है। कई नगर जहां पानी की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल लबालब हुई बारिश से अधिकांश बांधों और बड़े जलाशयों में इतना पानी है कि प्रदेश के सभी नगरों में जुलाई माह तक पर्याप्त जलापूर्ति की जा सके। प्रदेश के 56 में से 32 बांधों में पिछले साल से अधिक पानी जमा है, लेकिन राज्य के अधिकांश नगरीय इलाकों में अब भी पानी की सप्लाई स्थानीय नदियों या तालाबों के साथ ही ग्राउंड वाटर से ही की जाती है। इन छोटे शहरों और कस्बों के लिए बड़े बांधों या नदियों से वाटर सप्लाई के लिए प्लान बनाने की योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी है।
162 निकायों में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति
प्रदेश में कुल 413 नगरीय निकाय हैं, इनमें 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद हैं। इसके अलावा मप्र में 5 कैंट बोर्ड भी हैं, जिनकी देखरेख नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा की जाती है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में अब केवल 241 में ही रोजाना वाटर सप्लाई हो पा रही है। 162 नगरीय निकायों में फिलहाल एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जा रही है। सबसे भीषण जल संकट छिंदवाड़ा के न्यूटन चिखली और डोंगर परासिया में है, वहां तीन दिन के अंतराल पर जलापूर्ति की जा रही है। इसके चलते लोग जमकर परेशान हैं और इलाके में निर्माण कार्य भी ठप हैं। छिंदवाड़ा जिले के ही चांद, हर्रई एवं बिछुआ, सीहोर जिले के जावर, रायसेन जिले के मंडीदीप, गुना जिले के कुंभराज, बैतूल जिले के आमला और सागर जिले के शाहपुर में दो दिनों के अंतराल पर पानी दिया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार गर्मी का यह दौर आगामी एक माह तक जारी रहने की संभावना है, ऐसे में अन्य नगरीय इलाकों में भी नियमित वाटर सप्लाई प्रभावित हो सकती है। प्रदेश के संभागों के नजरिए से देखा जाए तो सबसे अधिक जल संकट की स्थिति इंदौर और उज्जैन संभाग में बनी हुई है। इंदौर डिवीजन के 55 नगरीय निकायों में से केवल 13 ही ऐसे हैं जहां फिलहाल रोज पानी की सप्लाई हो पा रही है और शेष 42 निकायों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। इसी तरह उज्जैन में 67 में से केवल 24 निकायों में ही रोजाना जलापूर्ति हो रही है, शेष 43 निकायों में अब एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। भोपाल के भी हालात बेहतर नहीं कहे जा सकते, यहां के 43 में से केवल 24 नगरों में ही रोजाना वाटर सप्लाई हो रही है, जबकि 17 में एक दिन के अंतराल और 2 निकायों में तो दो दिन के अंतराल के बाद जलापूर्ति की जा रही है। रीवा संभाग फिलहाल जल संकट के नजरिए से बचा हुआ है क्योंकि यहां सभी 32 नगरीय निकायों में रोज पानी दिया जा रहा है। वहीं जबलपुर के 56 निकायों में से 46 में रोजाना, तो 5 में एक दिन छोड़कर, 3 में दो दिन में, 2 में 3 दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जा रही है। वहीं नर्मदापुरम के 21 निकायों में से 14 में डेली,6 में 1 दिन,1 में 2 दिन के अंतराल पर पानी सप्लाई हो रही है। सागर संभाग की 58 निकायों में से 28 में डेली, 29 में एक दिन और 1 में 2 दिन के अंतराल पर तो शहडोल के 22 निकायों में से 20 में रोजाना और 2 में एक दिन के अंतराल पर पानी की सप्लाई की जा रही है। वहीं ग्वालियर-चंबल संभाग के 59 निकायों में से 40 में रोजाना, 18 में एक दिन और 1 में दो दिन के अंतराल पर जलापूर्ति की जा रही है।
