
- 3 राज्य सरकार ने प्रदेश से मांगे टाइगर
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। देश में टाइगर स्टेट के रूप में पहचान बना चुके मध्य प्रदेश के बाघ अब अन्य राज्यों को भी आकर्षित कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और झारखंड ने मध्यप्रदेश से बाघों की मांग की है। इससे पहले राजस्थान, छत्तीसगढ़ और ओडिशा भी बाघों की मांग कर चुके हैं, जिनमें से दो बाघ राजस्थान को भेजे जा चुके हैं। वन विभाग के अनुसार वर्ष 2022 की बाघ गणना में मध्यप्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे और पिछले कुछ वर्षों में इनकी संख्या लगातार बढ़ी है।
बाघों की बढ़ती आबादी के कारण उनके लिए उपलब्ध क्षेत्र सीमित पडऩे लगा है, जिससे टेरिटरी को लेकर संघर्ष की स्थिति बन रही है। इसके चलते बाघों की मौत के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अन्य राज्यों को बाघ भेजने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, आंध्रप्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं वन मंत्री पवन कल्याण ने पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान के लिए मध्यप्रदेश से दो बाघिनों की मांग की है। इस संबंध में प्रस्ताव प्राप्त हो चुका है। मध्यप्रदेश ने वहां के पर्यावरण और अनुकूल परिस्थितियों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट अनुकूल होने और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की मंजूरी मिलने के बाद बाघिनों को भेजा जाएगा। वहीं झारखंड ने तीन बाघ (दो मादा और एक नर) के साथ 50 बायसन और 50 सांभर की भी मांग की है, जिन्हें पालामू टाइगर रिजर्व में बसाया जाना प्रस्तावित है। यह प्रस्ताव फिलहाल एनटीसीए की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
कमलनाथ सरकार में भी बाघ मांगे गए थे: जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश तीनों राज्यों से बाघ के बदले में अन्य वन्य प्राणियों की मांग कर सकती है। बता दें कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ ने कमलनाथ सरकार में बाघ मांगे थे। उस समय दोनों ही राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। कुछ समय बाद सरकार गई और यह डिमांड फाइलों में ही कैद हो गई। लेकिन अब जब ओडिशा, छत्तीसगढ़ और राजस्थान तीनों राज्यों में बीजेपी की सरकार है, ऐसे में माना जा रहा है कि उनकी यह डिमांड सरकार पूरी कर सकती है। फि़लहाल बाघ को दूसरे राज्य भेजने से पहले यह भी देखा जाएगा कि जहां पर वह रहेंगे वहां की भौगोलिक स्थिति कैसी है। अब मध्य प्रदेश के टाइगर को दूसरे राज्य में कब शिफ्ट किया जाता है, उन्हें अनुमति मिलेगी या नहीं यह भविष्य में मालूम पड़ेगा।
बाघों के स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली गई
इसी तरह तेलंगाना के कवाल टाइगर रिजर्व में मी बाघों की स्थायी आबादी विकसित करने के लिए मध्य प्रदेश से बाघ मांगे गए है। वर्तमान में यहां बाघों की आवाजाही तो होती है, लेकिन कोई स्थायी आबादी विकसित नहीं हो सकी है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान के रामगढ़ विषधारी राष्ट्रीय उद्यान में दो बाघ पहले ही शिफ्ट किए जा चुके हैं। वहीं ओडिशा के डेबीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में भी बाघों के स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली गई है।
दो बाघ राजस्थान शिफ्ट
ओडिशा और राजस्थान सरकार ने बीते वर्ष मप्र से बाघ मांगे थे। एलटीसीए की सहमति के बाद इन तीनों राज्यों में 10 बाघ भेजे जाने पर सहमति बन गई थी। इनमें से दो बाघ राजस्थान मेजे जा चुके हैं। बाकी दोनों राज्यों को भी बाघ भेजे जाने की योजना प्रक्रिया में है। वहीं ओडिशा सरकार ने मप्र से मिलने वाले बाघ के स्वागत के लिए डेब्रीगढ़ वाइल्ड लाइफ सेक्चुरी में तैयारी पूरी कर ली है। राज्यों के लिए प्रक्रिया जारी – बल प्रमुख धन बल प्रमुख (पीसीसीएफ हॉफ) शुभरंजन सेन के अनुसार, राजस्थान को दो बाध भेजे जा चुके हैं और अन्य राज्यों के लिए प्रक्रिया जारी है। तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के साथ फिलहाल प्रारंभिक स्तर पर चर्चा चल रही है।
