- ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा के बाद भी संस्था के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र के सरकारी विभागों में अधिकारियों की मिलीभगत से कई संस्थाएं अमानक और गुणवत्ताहीन सामग्री प्रदाय कर सरकार को चपत लगा रही है। ऐसी ही एक संस्था मेसर्स साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक्ससिस्टम ने करीब सवा साल पहले सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को अमानक और गुणवत्ताहीन इलेक्ट्रॉनिक सामान प्रदाय किया था। सस्ते सामान की अधिक कीमत बताकर अधिक भुगतान लिया। अनियमितता और गड़बड़ी करने वाली ऐसी संस्था को विभाग के अधिकारी छह महीने से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इस गड़बड़ी की जांच के लिए गठित कमेटी छह महीने पहले संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा कर चुकी है, लेकिन अब न तो संस्था ब्लैकलिस्ट ही हुई है और न ही किसी तरह की कार्रवाई की गई है।
गौरतलब है कि मप्र के जनपद एवं जिला कार्यालयों एवं संचालनालय सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में प्रदाय हेतु 467 कम्प्यूटर, 457 प्रिंटर एवं 453 यूपीएस, 5 लैपटॉप एवं एक वॉल टॉप कम्प्युटर की खरीदी हेतु 18 सितम्बर 2024 को स्वीकृति तथा 10 करोड़, 99 लाख 31 हजार 26 रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी। संचालनालय ने 23 सितम्बर को जेम पोर्टल के माध्यम से ई-निविदा आमंत्रित की। 31 अक्टूबर 2024 को खुली इस निविदा में सबसे कम दर 10 करोड़, 99 लाख, 29 हजार 779 के साथ मेसर्स सांई बाबा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम, भोपाल ने बाजी मारी। इस संस्था ने जनपद एवं जिला कार्यालयों तथा संचालनालय में 44 कम्प्यूटर 34 प्रिंटर एवं 30 यूपीएस पद्राय किए गए। प्रदाय की गई सामग्री की खराब गुणवत्ता के के संबंध में 23 जून 2025 को जगदीश रायकवार नामक व्यक्ति ने शिकायत की। इसकी जांच के लिए विभागीय उप संचालक आर के सिंह और डॉ. श्रवण कुमार पचौरी और लेखा अधिकारी लाजवंती अभिचंदानी की कमेटी बनाकर की गई। जांच में शिकायत के सभी आरोप सही पाए गए। इसके बाद कमेटी ने सितम्बर 2025 में संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और उसकी देय योग्य राशि को राजसात करने की अनुशंसा की, लेकिन छह महीने में सिर्फ इस संस्था को सिर्फ नोटिस भेजकर जवाब प्राप्त होने तक की औपचारिकता हो सकी है।
प्रदाय सामग्री में मिली कई तरह की गड़बडिय़ां
मेसर्स साईं बाबा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम द्वारा प्रदाय किए गए कम्प्यूटरों के बायोस में इंस्टॉलेशन 22 जुलाई 2024 दर्शाया, जबकि संचालनालय द्वारा कम्प्यूटरों को दिसंबर 2024 में खरीदा और स्थापित किया गया। वहीं कुछ कम्प्युटर खरीदी आदेश से पहले ही इंस्टॉल कर विभाग को गुमराह किया गया। संस्था ने संचालनालय को पुरानी सामग्री प्रदाय की। कम्प्युटर खोलकर चेक करने पर एसएसडी अनुबंध के अनुसार एसर कंपनी की नहीं होकर अमानक/लोकल कंपनी की लगाई गई। संचालनालय स्तर से रेन्डम तीन कम्प्यूटरों के हार्डवेयरों को चेक किया गया, जिसमें दो कम्प्यूटरों में रैम लगी मिली और एसएसडी भी एसर कंपनी की नहीं होकर लोकल लगी मिली। संस्था ने कम्प्यूटरों से छेड़खानी कर उनकी एसएसडी बदलकर प्रदाय किए गए। संस्था द्वारा प्रदाय 453 यूपीएस सायबर पॉवर कंपनी के हैं, डिब्बे पर जिनकी कीमत 6085 रुपये पाई गई। जबकि जेम पोर्टल पर पांच साल की वारंटी के साथ ऑफर प्राइज 3754 रुपये है, लेकिन संस्था को भुगतान प्रति यूपीएस 11247 रुपये के मान से किया गया। कमेटी ने पाया कि संस्था ने विभाग को गुमराह कर प्रति नग अधिक राशि का भुगतान प्राप्त कर वित्तीय अनियमितता की। मेसर्स सांई बाबा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम भोपाल द्वारा शासकीय दृष्टि बाधित विद्यालय, भोपाल एवं आशा निकेतन भोपाल में स्थापित स्मार्ट क्लास की डिवाइस का निरीक्षण भी किया गया, जो संतोषजनक नहीं पाई गई। इस तरह कमेटी ने संस्था को ब्लैकलिस्ट करने एवं देयक राशि राजसात करने की अनुशंसा की। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग सोनाली वायंगंकर का कहना है कि इस प्रकरण में कमेटी की अनुशंसा के बाद संबंधित संस्था को नोटिस जारी किया गया था। संस्था ने नोटिस का जवाब दिया है। जवाब के परीक्षण के बाद संस्था पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
