
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने निवाड़ी जिले में ओरछा वन्यजीव अभ्यारण्य के पास संचालित स्टोन क्रशरों और पत्थर खदानों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। एनजीटी ने संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर माना कि अधिकांश वैध खदानें अभ्यारण्य के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) की तय 2 किमी की सीमा से बाहर (लगभग 3.5 किमी दूर) संचालित हो रही हैं। इसके साथ ही एनजीटी ने क्षेत्र में पाए गए अवैध खनन कर्ताओं से 3 माह के भीतर पर्यावरणीय मुआवजा वसूलने के सख्त निर्देश दिए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उप्र- मप्र सीमा के गांवों में नियमों को ताक पर रखकर अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे दुर्लभ गिद्धों, कछुओं और वन्यजीवों वाले ओरछा अभ्यारण्य को खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा प्रतापपुरा में झांसी सैनिक स्कूल के नजदीक खनन से बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की बात भी कही गई थी।
