
बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास मिशन के तहत बांटे गए लोन की वसूली अब बैंकों के लिए चुनौती बन गई है। वर्तमान में योजना के तहत बैंकों की कुल 1,638 करोड़ रुपए की राशि डूबने की कगार पर है। हाल ही में हुई 198वीं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में पेश रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत बैंकों का एनपीए यानी डूबा हुआ कर्ज चिंताजनक रूप से 68.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह स्थिति न सिर्फ बैंकों की वित्तीय सेहत के लिए खतरा है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी बोझ बढ़ा रही है। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े बताते हैं कि पिछले 7 वर्षों में इस योजना के तहत रिकवरी की स्थिति लगातार खराब हुई है। मार्च 2020 में एनपीए 42 प्रतिशत था, जो मार्च 2024 तक बढक़र 53.3 प्रतिशत हो गया। मार्च 2025 के 63.1 प्रतिशत के मुकाबले मार्च 2026 तक यह 68.3 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
