मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण से जुड़े 100 से अधिक मामलों पर शुक्रवार को तीसरे दिन भी सुनवाई जारी रही। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के सामने वर्ष 1983 के महाजन आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया कि इसमें ओबीसी को 35 फीसदी आरक्षण देने की सिफारिश तो की गई थी, लेकिन आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा होने के कारण इसे लागू नहीं किया गया। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2019 में आरक्षण बढ़ाने से पहले यह नहीं बताया कि अब तक परिस्थितियों में क्या बदलाव आया है। इन मामलों पर सोमवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। सामान्य वर्ग की अशिता दुबे और यूथ फॉर इक्वालिटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी और गोपाल शंकर नारायण ने अपनी बहस पूरी की। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप संचेती सोमवार को दोपहर ढाई बजे से अपनी बहस शुरू करेंगे।
18/07/2026
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