प्रभारी मंत्रियों के विकास कार्यों का होगा सोशल ऑडिट

सोशल ऑडिट
  • मुख्यमंत्री का विकास, पारदर्शिता और रोजगार पर फोकस

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विशेष फोकस विकास, पारदर्शिता और रोजगार पर है। ऐसे में मप्र सरकार विकास कार्यों की निगरानी, सार्वजनिक सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देने की तैयारी में है।  प्रदेश में सतत विकास के लिए सरकार प्रभारी मंत्रियों के विकास कार्यों की सोशल ऑडिट कराएगी। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने प्रभारी मंत्रियों के विकास कार्यों का सोशल ऑडिट कराने और जिलों के विकास का वैज्ञानिक आकलन करने पर जोर दिया है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आगामी स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर जिला मुख्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों में हुए विकास कार्यों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करें। सरकार इसे विकास कार्यों के सोशल ऑडिट के रूप में देख रही है, ताकि जनता को यह जानकारी मिल सके कि सरकारी योजनाओं और बजट का उपयोग किस प्रकार किया गया। सरकार का मानना है कि विकास कार्यों की पारदर्शिता बढऩे से जवाबदेही सुनिश्चित होगी और योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति जनता के सामने आएगी।
हर जिले का विकास सूचकांक होगा अलग
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों को एक ही पैमाने पर नहीं आंका जा सकता। किसी जिले की पहचान जंगलों से है, किसी की खनिज संपदा से, तो कहीं कृषि और उद्योग प्रमुख आधार हैं। इसलिए जिलावार विकास सूचकांक स्थानीय परिस्थितियों और संसाधनों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए। उन्होंने विभागवार, संभागवार और जिलावार आंकड़ों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, जिससे नीति निर्माण और निगरानी की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके।
विधायक निधि से लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए कि विधायक निधि का उपयोग सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने में किया जाए। उनका कहना था कि कई बार विकास कार्य कराए जाने के बाद उनकी निगरानी और संरक्षण नहीं हो पाता। ऐसे में सीसीटीवी व्यवस्था न केवल सुरक्षा बढ़ाएगी बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों की निगरानी में भी मददगार होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधायक निधि के उपयोग में देरी की प्रवृत्ति को रोका जाए। निधि लैप्स नहीं होने के कारण कई बार राशि को वर्षों तक रोके रखने की प्रवृत्ति देखने को मिलती है, जिसे समाप्त करने की आवश्यकता है।
ईको-फ्रेंडली आवास निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने किफायती आवास योजनाओं में पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात कही है। उनका मानना है कि इससे निर्माण लागत कम होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा मृत्यु पंजीयन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विश्राम घाटों पर ही आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
सामुदायिक नेतृत्व कार्यक्रम से 1.37 लाख छात्र लाभान्वित
अफसरों ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के तहत अब तक 1 लाख 37 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। वहीं जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्रस्फुटन और नवांकुर समितियों ने कुओं, बावडिय़ों, तालाबों और नदी घाटों की सफाई सहित विभिन्न जल संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की है।
मत्स्य क्षेत्र में निवेश का नया अध्याय
वहीं मुख्यमंत्री ने मत्स्य विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के कारण प्रदेश में मछली पालन क्षेत्र में 9000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आने की संभावना है। इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और निर्यात बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विभाग को लक्ष्य दिया कि अगले ढाई वर्षों में प्रदेश को मछली बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़े। इसके लिए प्रत्येक जिले में कम से कम एक आधुनिक हैचरी विकसित करने पर जोर दिया गया है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो प्रदेश के मछली पालकों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होगा और उत्पादन लागत में कमी आएगी।
मोती उत्पादन और जलीय पर्यटन पर फोकस
सरकार अब पारंपरिक मछली पालन के साथ-साथ मोती उत्पादन को भी बढ़ावा देना चाहती है। मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों की सफल योजनाओं का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश में लागू करने के निर्देश दिए। इसके अलावा जलाशयों और जल संसाधनों को पर्यटन से जोडकऱ जलीय ईको-सिस्टम आधारित पर्यटन विकसित करने की योजना भी तैयार की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। प्रदेश में बढ़ते मछली उत्पादन को देखते हुए कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट और परिवहन सुविधाओं जैसे आवश्यक कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी जोर दिया गया है। साथ ही मछली उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग को बढ़ावा देने की रणनीति बनाई जा रही है।

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