अब अधिकारी-कर्मचारी भी लगाएंगे ई-अटेंडेंस

ई-अटेंडेंस
  • स्कूल शिक्षा विभाग ने एक जुलाई से पूरे अमले के लिए लागू की डिजिटल हाजिरी व्यवस्था

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। स्कूल शिक्षा विभाग ने डिजिटल निगरानी और प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अब अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी ई-अटेंडेंस व्यवस्था अनिवार्य कर दी है। एक जुलाई 2026 से विभाग के सभी कार्यालयों और संस्थानों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों को विभागीय पोर्टल और ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। अब तक यह व्यवस्था मुख्य रूप से शिक्षकों के लिए लागू की जा रही थी, लेकिन नए आदेश के बाद पूरा शिक्षा अमला इसके दायरे में आ जाएगा। हालांकि विभाग के इस निर्णय के साथ ही शिक्षकों के बीच नई बहस भी शुरू हो गई है। शिक्षक संगठनों ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए कहा है कि यदि ई-अटेंडेंस पूरे विभाग के लिए अनिवार्य है, तो इसके नियम और शर्तें भी सभी के लिए समान होनी चाहिए। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा सोमवार को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 20 जून को शिक्षकों के लिए जारी ई-अटेंडेंस संबंधी निर्देशों का विस्तार अब विभाग के सभी कार्यालयों और संस्थानों तक किया जा रहा है। आदेश पर आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह और संचालक राज्य शिक्षा केंद्र हरजिंदर सिंह के संयुक्त हस्ताक्षर हैं। नई व्यवस्था के तहत विभागीय ऐप और ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य विभाग में कार्यप्रणाली की एकरूपता लाना और उपस्थिति संबंधी रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी बनाना बताया गया है। एक जुलाई से लागू होने वाली इस व्यवस्था के अंतर्गत शिक्षा विभाग के लगभग सभी प्रशासनिक स्तर शामिल होंगे। इनमें जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ), जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी), विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ), ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर (बीआरसी), जन शिक्षा केंद्र, संकुल केंद्र, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), पीजीबीटी कॉलेज, लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई)और राज्य शिक्षा केंद्र (आरएसके) सहित विभाग के अन्य कार्यालयों और संस्थानों का पूरा सरकारी अमला शामिल रहेगा। शिक्षक संगठनों का तर्क है कि जनवरी से मार्च 2026 के बीच बड़ी संख्या में शिक्षकों को परीक्षा और मूल्यांकन संबंधी कार्यों में लगाया गया था। इसके चलते कई बार विद्यालय से बाहर रहकर शासकीय कार्य करना पड़ा, जिससे ई-अटेंडेंस का प्रतिशत प्रभावित हुआ।
शिक्षकों ने उठाया समानता का मुद्दा
विभाग के नए आदेश के बाद शिक्षक संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब ई-अटेंडेंस अब पूरे विभाग के लिए लागू की जा रही है, तो स्थानांतरण नीति में केवल शिक्षकों के लिए कठोर शर्तें क्यों रखी गई हैं। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने कहा कि स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए शिक्षकों पर 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता लगाई गई है, जबकि कई शिक्षक बोर्ड परीक्षाओं, मूल्यांकन कार्य, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, जनगणना और अन्य शासकीय दायित्वों में व्यस्त रहे। ऐसे कार्यों के दौरान तकनीकी और व्यावहारिक कारणों से उनकी उपस्थिति रिकॉर्ड प्रभावित हुई है।
विभाग में बढ़ेगी जवाबदेही
शिक्षा विभाग का मानना है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू होने से उपस्थिति संबंधी विवाद कम होंगे और अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण भी अधिक प्रभावी होगा। विभाग इसे शासन की डिजिटल गवर्नेंस नीति का हिस्सा मान रहा है।

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