बुजुर्ग, महिला और बीमार के घर जाकर होंगे बयान

  • अब गवाह को थाने नहीं बुलाएगी पुलिस…!

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में पुलिस जांच के दौरान गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और गंभीर रूप से बीमार लोगों को बयान के लिए थाने नहीं बुलाया जाएगा। जरूरत होने पर पुलिस खुद उनके घर जाकर बयान दर्ज करेगी। पीएचक्यू की सीआईडी शाखा ने भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों और संबंधित इकाइयों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य जांच में गवाहों की भागीदारी आसान करना और उन्हें अनावश्यक परेशानी से बचाना है।
    नए निर्देशों के तहत संबंधित गवाह अपनी सुविधा के अनुसार बयान की तारीख, समय और स्थान तय कर सकेगा। यदि कोई बुजुर्ग, महिला, दिव्यांग या गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति थाने जाकर बयान देना चाहता है, तभी वहां उसका बयान लिया जा सकेगा। इस व्यवस्था से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें उम्र, बीमारी या शारीरिक स्थिति के कारण थाने तक आने-जाने में परेशानी होती है। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस श्रेणी के लोगों को केवल बयान दर्ज करने के लिए उनके घर से बाहर न बुलाया जाए।
    दूसरे शहर से आने वाले गवाहों का खर्च भी
    जांच में किसी गवाह को उसके निवास स्थान से दूर किसी दूसरे स्थान पर बुलाने की जरूरत पड़ती है तो उसके आने-जाने और आवश्यक खर्च का भुगतान पुलिस की ओर से किया जाएगा। अब तक कई मामलों में गवाहों को अपनी नौकरी या काम छोडकऱ पुलिस जांच में शामिल होने के लिए दूसरे शहरों तक आना पड़ता था। खर्च और समय की वजह से भी लोग जांच में सहयोग करने से बचते थे। नए प्रावधान का उद्देश्य इस परेशानी को कम करना है।
    फिंगरप्रिंट और आवाज के नमूने के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति
    पुलिस जांच में किसी व्यक्ति की आवाज, फिंगरप्रिंट, हैंडराइटिंग या हस्ताक्षर के नमूने लेने के मामले में भी प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। पुलिस अपनी ओर से ऐसे नमूने नहीं ले सकेगी; इसके लिए मजिस्ट्रेट से लिखित आदेश लेना होगा। बीएनएसएस की धारा 349 के तहत मजिस्ट्रेट गिरफ्तार आरोपी के अलावा ऐसे व्यक्ति से भी नमूना लेने का आदेश दे सकता है, जिसे उस मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया है। यानी जांच के लिए नमूना आवश्यक होने की स्थिति में व्यक्ति की गिरफ्तारी होना अनिवार्य नहीं है, लेकिन निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना होगा।
    पुलिस को नियमों के पालन के सख्त निर्देश
    पीएचक्यू की सीआईडी शाखा ने सभी संबंधित पुलिस इकाइयों को निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है। नई व्यवस्था में एक तरफ संवेदनशील श्रेणी के गवाहों को थाने बुलाने से राहत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ साक्ष्य के रूप में जैविक या पहचान संबंधी नमूने लेने के लिए न्यायिक अनुमति की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। इससे पुलिस जांच में गवाहों की सुविधा और उनके अधिकारों के साथ जांच की कानूनी प्रक्रिया दोनों को ध्यान में रखने की व्यवस्था लागू होगी।

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