
- एम्स भोपाल देश के छह बड़े संस्थानों में 612 महिलाओं पर 12 महीने तक करेगा जांच
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हार्मोनल असंतुलन की बीमारी पालिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) से छुटकारा दिलाने के लिए एम्स भोपाल बड़ा शोध शुरू कर रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के सहयोग से हो रहे इस बहुकेंद्रीय अध्ययन में एम्स भोपाल का शरीर क्रिया विज्ञान (फिजियोलाजी) विभाग देश के पांच अन्य प्रमुख संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि खान-पान, नींद और दिनचर्या में सभी बदलाव एक साथ लागू करने से ज्यादा फायदा मिलता है या फिर एक-एक करके धीरे-धीरे बदलाव लाना ज्यादा असरदार रहता है। इस अध्ययन से महिलाओं को अनियमित माहवारी और बांझपन जैसी समस्याओं से स्थायी राहत पाने की सही राह मिलेगी। सही जीवनशैली अपनाने से आगे चलकर होने वाले इंसुलिन असंतुलन, मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा भी काफी कम हो जाएगा। इसके अलावा पूरे एक साल तक चलने वाले इस शोध के दौरान विशेषज्ञों की टीम महिलाओं के खान-पान, कसरत, नींद और मानसिक तनाव पर लगातार नजर रखेगी तथा हर 15 दिन में उन्हें व्यक्तिगत मार्गदर्शन और परामर्श दिया जाएगा।
छह मेडिकल कालेजों में होगा शोध
एम्स गोरखपुर के नेतृत्व में हो रहे इस प्रोजेक्ट में एम्स भोपाल, एम्स नागपुर, एम्स दिल्ली, एम्स राजकोट और एसपीजीएमसी मंदसौर शामिल हैं। इसमें 18 से 45 वर्ष की कुल 612 पीसीओएस पीड़ित महिलाओं पर अध्ययन किया जाएगा, जिसमें एम्स भोपाल में 102 महिलाएं शामिल होंगी। इस अध्ययन में जीवनशैली के छह मुख्य पहलुओं – पौधों पर आधारित आहार, नियमित कसरत, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन, सामाजिक जुड़ाव और नशामुक्ति पर विशेष रूप से काम किया जाएगा।
दो अलग-अलग तरीकों की होगी तुलना
परीक्षण के दौरान मरीजों को दो अलग-अलग समूहों में बांटकर तुलना की जाएगी। लगातार समूह में शामिल महिलाओं को शुरुआत में ही दिनचर्या के सभी छह बदलाव एक साथ अपनाने की सलाह दी जाएंगी और 90 मिनट का मार्गदर्शन सत्र दिया जाएगा। वहीं चरणबद्ध समूह की महिलाओं को शुरुआत में केवल खान-पान और व्यायाम पर ध्यान देने को कहा जाएगा, जिसके बाद नींद, तनाव और सामाजिक जुड़ाव जैसे गों में अन्य पहलुओं को धीरे-धीरे चरणों में जोड़ा जाएगा।
चार चरणों में होगी महिलाओं की सेहत की जांच
अध्ययन में शामिल महिलाओं की सेहत में आ रहे सुधार को मापने के लिए समय-समय पर जांच की जाएगी। शुरुआत में बेर्सलाइन टेस्ट करने के बाद 90वें, 1800, 270वें और 360वें दिन (यानी हर तीन महीने में) महिलाओं का अल्ट्राब्राउंड, हार्मोनल जांच, वजन और पोषण का मूल्यांकन किया जाएगा। इस परियोजना का नेतृत्व मुख्य अन्वेषक डा. वरुण मल्होत्रा कर रहे हैं। फिजियोलाजी विभागाध्यक्ष डा. संतोष वाकोडे और डा. रागिनी श्रीवास्तव सह-मुख्य अन्वेषक के रूप में भूमिका निभा रहे हैं। परियोजना का दैनिक प्रबंधन नैना भार्गव और मुकेश पटेल द्वारा किया जा रहा है।
