
- असम से एमपी तक फैला फर्जी पासपोर्ट का खेल
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में सामने आए करीब 70 फर्जी पासपोर्ट मामलों की जांच में अब सिर्फ फर्जी दस्तावेज बनाने का मामला नहीं, बल्कि पहचान को कई राज्यों में फैलाकर जांच एजेंसियों को भ्रमित करने की सुनियोजित रणनीति सामने आ रही है। एसटीएफ की पड़ताल में पता चला है कि रैकेट से जुड़े लोगों ने अपनी पहचान की एक कड़ी दूसरे राज्य में और दूसरी कड़ी मध्यप्रदेश में बनाई। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर नए पते और पहचान से जुड़े दस्तावेज तैयार कराए गए और अंतत: पासपोर्ट हासिल कर लिए गए। जांच के अनुसार, रैकेट के मास्टरमाइंड रियाल चौधरी और उसके साथियों ने बांग्लादेश से भारत में दाखिल होने के बाद सीधे मध्यप्रदेश का रुख नहीं किया। पहले असम में स्थानीय पहचान से जुड़े दस्तावेज तैयार कराए गए। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ग्वालियर, भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में अलग-अलग पहचान और पते से दस्तावेज बनवाए गए।
एसटीएफ को जांच में जो पैटर्न मिला है, उसमें एक दस्तावेज दूसरे दस्तावेज का आधार बना। असम में तैयार कराई गई पहचान के सहारे मध्यप्रदेश में नया पता हासिल किया गया और फिर उसी पते से अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार कराने की कोशिश की गई। इस तरह आरोपियों ने अपनी वास्तविक पहचान से दूरी बनाते हुए दस्तावेजों की कई परतें तैयार कर लीं। पूछताछ में रियाल चौधरी ने खुद को असम में जन्मा हुआ बताने की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसी के मुताबिक उसके पिता सीमा पार से भारत आए थे। असम से बैतूल और फिर भोपाल पहुंचने के बाद उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए अशोक बौद्ध विहार में भंते के रूप में रहना शुरू किया।
भोपाल का एक पता जांच के केंद्र में
इस पूरे मामले में भोपाल का अन्ना नगर स्थित अशोक बौद्ध विहार जांच का अहम केंद्र बन गया है। एसटीएफ के मुताबिक, इसी पते से 40 से अधिक फर्जी पासपोर्ट जारी हुए। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इतने लोगों के दस्तावेज एक ही पते से कैसे तैयार हुए और सत्यापन प्रक्रिया में इन मामलों की पहचान क्यों नहीं हो सकी। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कोविड-19 महामारी का दौर भी है। उस समय देशभर में आवाजाही और सरकारी कामकाज प्रभावित था। कई जगह प्रत्यक्ष सत्यापन और सामान्य प्रक्रियाएं सीमित थीं। एसटीएफ को आशंका है कि रैकेट से जुड़े लोगों ने इसी परिस्थितियों का फायदा उठाकर दस्तावेज और पासपोर्ट की प्रक्रिया पूरी कराई।
विदेश यात्राओं ने बढ़ाई जांच की दिशा
एसटीएफ ने रैकेट के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। एसपी राजेश भदौरिया के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल डेटा की जांच में कंबोडिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और चीन की यात्राओं से जुड़े तथ्य सामने आए हैं। हालांकि, अब तक किसी आतंकी कनेक्शन की पुष्टि नहीं हुई है। अब जांच सिर्फ पासपोर्ट जारी होने तक सीमित नहीं है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन पासपोर्ट का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और इनके जरिए विदेश जाने वाले लोगों में कितने लोग वापस भारत लौटे।
70 पासपोर्ट धारकों की लोकेशन ट्रेस
एसटीएफ अब उन करीब 70 लोगों की लोकेशन और गतिविधियों का पता लगा रही है, जिनके नाम पर फर्जी पासपोर्ट जारी होने की बात सामने आई है। इनमें से कुछ के विदेश जाने और वापस नहीं लौटने की आशंका भी जांच के दायरे में है। साथ ही एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि फर्जी पहचान तैयार करने से लेकर पासपोर्ट हासिल करने तक की प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर किस-किस व्यक्ति या तंत्र की मदद मिली। असम से मध्यप्रदेश तक फैली दस्तावेजी कड़ियों और भोपाल के एक ही पते से बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी होने के कारण जांच अब एक संगठित नेटवर्क की भूमिका पर केंद्रित हो गई है। एसटीएफ का फोकस अब इस बात पर है कि 70 पासपोर्ट की पूरी श्रृंखला में फर्जी दस्तावेज कहां तैयार हुए, सत्यापन किस स्तर पर हुआ और इनका इस्तेमाल भारत तथा विदेश में किन गतिविधियों के लिए किया गया।
