
- करोड़ों नागरिकों के डेटा में कहां हैं सुराख, निजी एजेंसी तलाशेगी जोखिम
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं और सेवाओं के डिजिटल विस्तार के साथ सरकार के पास नागरिकों से जुड़ी निजी जानकारियों का बड़ा डेटाबेस तैयार हो चुका है। अब इन डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा व्यवस्था की जांच होगी। सरकार यह पता लगाएगी कि नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा कहां-कहां एकत्रित और प्रोसेस हो रहा है, उसकी पहुंच किन स्तरों तक है और मौजूदा सिस्टम में डेटा लीक के संभावित रास्ते कहां हैं। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन यानी डीपीडीपी एक्ट और नियमों के अनुपालन की तैयारी के तहत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) ने कंसल्टिंग एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू की है। चुनी जाने वाली एजेंसी सरकार की मौजूदा डेटा सुरक्षा व्यवस्था का आकलन कर कंप्लायंस गैप असेसमेंट रिपोर्ट तैयार करेगी। पूरी प्रक्रिया में करीब एक साल लगने की संभावना है।
एजेंसी सबसे पहले खोजेगी डेटा का पूरा नक्शा: कंसल्टिंग एजेंसी का काम सिर्फ नियमों की जानकारी देना नहीं होगा। वह यह आकलन करेगी कि सरकार के अलग-अलग विभागों में किस तरह का व्यक्तिगत डेटा मौजूद है, वह कहां से प्राप्त हुआ, किस उद्देश्य से इस्तेमाल हो रहा है और उसकी प्रोसेसिंग किन सिस्टम में की जा रही है। इसके बाद मौजूदा व्यवस्था और डीपीडीपी नियमों के बीच अंतर यानी कंप्लायंस गैप की पहचान की जाएगी। रिपोर्ट में डेटा सुरक्षा की कमियां, संभावित जोखिम, प्राथमिकता वाले क्षेत्र और सुधार के उपाय बताए जाएंगे।
डेटा लीक हुआ तो किसकी जवाबदेही?: नई व्यवस्था में डेटा सुरक्षा के साथ जवाबदेही भी अहम हिस्सा होगी। एजेंसी यह भी देखेगी कि अगर किसी सिस्टम से व्यक्तिगत डेटा लीक होता है तो किस स्तर पर क्या कार्रवाई होगी और जिम्मेदारी किसकी तय होगी। सरकारी सिस्टम में डेटा के संग्रह, इस्तेमाल, साझा करने और सुरक्षा से जुड़ी मौजूदा प्रक्रियाओं का भी परीक्षण किया जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि डेटा की सुरक्षा केवल तकनीकी स्तर पर है या विभागीय प्रक्रियाओं में भी पर्याप्त नियंत्रण मौजूद हैं।
बनेगा कंसेंट मैनेजर का सिस्टम: सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था में कंसेंट मैनेजर की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। इसके जरिए नागरिक अपने व्यक्तिगत डेटा के उपयोग के लिए सहमति दे सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उसे वापस ले सकेंगे।
योजनाओं के साथ बढ़ता गया निजी डेटा
सरकारी सेवाओं के ऑनलाइन होने के साथ नागरिकों की कई तरह की व्यक्तिगत जानकारियां अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज हैं। इनमें आधार और मोबाइल नंबर से लेकर बैंक खाते, परिवार की जानकारी, जमीन, पेंशन, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। मप्र ई-सेवा, किसान वेब पोर्टल, एमपी ई-एचआरएमएस, लाड़ली लक्ष्मी योजना 3.0, लाड़ली बहना, समग्र 2.0, संबल 2.0, संपदा 2.0, पीएम आवास, यूनिपे और पीएम कुसुम सोलर पंप सहित कई डिजिटल प्रोजेक्ट में नागरिकों से जुड़ा डेटा प्रोसेस किया जा रहा है। अस्पतालों, जमीन, नगर निकायों और सरकारी कर्मचारियों से संबंधित सिस्टम भी इस दायरे में आते हैं।
नागरिकों को मिलेंगे डेटा पर ज्यादा अधिकार
डीपीडीपी व्यवस्था के तहत नागरिकों को अपने व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल के संबंध में कई अधिकार मिलने हैं। वे जान सकेंगे कि उनका कौन सा डेटा एकत्रित किया गया है, उसे किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा है और कुछ परिस्थितियों में उसमें सुधार या उसे हटाने का अनुरोध कर सकेंगे। नागरिक अपनी सहमति देने या वापस लेने से जुड़े अधिकारों का इस्तेमाल भी कर सकेंगे। बच्चों के डेटा के मामले में माता-पिता या अभिभावक की सत्यापित सहमति की व्यवस्था होगी। डेटा से जुड़े सवालों के लिए निर्धारित संपर्क अधिकारी की व्यवस्था भी करनी होगी।
