मप्र में जेन-जी और जेन-अल्फा से सीधा संवाद करेगा संघ

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अब मध्य प्रदेश में नई पीढ़ी के युवाओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने की तैयारी में है। जेन-जी और जेन-अल्फा को केंद्र में रखते हुए संघ ने प्रदेश के प्रमुख शहरों में युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की रणनीति बनाई है। इसी कड़ी में 20 सितंबर को भोपाल में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले युवाओं से सीधे संवाद करेंगे। इसके अलावा इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में भी संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के स्तर पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है। संघ की इस पहल को नई पीढ़ी के साथ सीधे संवाद स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब तक संघ की गतिविधियों का बड़ा हिस्सा संगठन, सामाजिक संपर्क और विभिन्न क्षेत्रों में चलने वाले सेवा कार्यों के इर्द-गिर्द रहा है। लेकिन नई पीढ़ी की बदलती सोच, डिजिटल दुनिया में बढ़ती सक्रियता और सामाजिक मुद्दों पर युवाओं की अलग राय को देखते हुए संघ ने युवा संवाद को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के बाद अब सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले के स्तर पर युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इससे इस पहल की प्राथमिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। संघ नई पीढ़ी के युवाओं को केवल अपने विचार बताने के बजाय उनसे उनकी राय, सवाल, शिकायतें और अनुभव जानने की कोशिश कर रहा है। दिल्ली में जेन-जी से जुड़े प्रदर्शन के बाद संघ की ओर से युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने की पहल तेज हुई है। दिल्ली, मुंबई और नागपुर जैसे शहरों में कार्यक्रमों के बाद अब इसे देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की योजना बनाई जा रही है। संघ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में करीब 150 से 200 शहरों में युवाओं के बीच संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। मध्य प्रदेश को भी इसी व्यापक अभियान का हिस्सा बनाया गया है। प्रदेश के चार प्रमुख शहरों में होने वाले कार्यक्रमों में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े युवाओं को संवाद के लिए जोड़े जाने की तैयारी है।
सिर्फ भाषण नहीं, युवाओं की बात भी सुनेगा संघ
युवा संवाद की खास बात यह होगी कि इसमें संघ के पदाधिकारी युवाओं के सवाल और उनकी प्रतिक्रिया सुनने पर भी जोर देंगे। युवाओं की शिक्षा, रोजगार, तकनीक, सामाजिक बदलाव और भविष्य को लेकर चिंताओं को समझने का प्रयास किया जाएगा। सरकार की नीतियों और मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों को लेकर युवाओं की राय भी संवाद का हिस्सा बन सकती है। संघ का मानना है कि नई पीढ़ी के साथ प्रभावी संपर्क के लिए केवल अपने विचार रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि युवा किन मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं और वर्तमान व्यवस्था को किस नजरिए से देखते हैं। युवाओं की शिकायतों और सुझावों से भविष्य के कार्यक्रमों की दिशा तय करने में भी मदद मिल सकती है। इससे संघ को नई पीढ़ी के बीच अपनी सामाजिक पहुंच बढ़ाने के लिए नए कार्यक्रम तैयार करने का आधार मिलेगा।

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