सडक़ों का महाप्लान: 15 परियोजनाओं पर 16 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम (एमपीआरडीसी) प्रदेश में सडक़ अवसंरचना को मजबूत करने के लिए 932 किलोमीटर लंबाई की 15 प्रमुख सडक़ परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत प्रस्तावित इन परियोजनाओं पर 16,312.66 करोड़ रुपए की निर्माण लागत खर्च की जाएगी, जबकि कुल एसेट एक्विजिशन लागत लगभग 38,505.79 करोड़ रुपए आंकी गई है। इन परियोजनाओं में कई प्रस्ताव राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति के पास मंजूरी के लिए भेजे जा चुके हैं, जबकि कुछ परियोजनाएं निविदा, अनुबंध और निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश के प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और कृषि उत्पादन केंद्रों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा।
सबसे लंबी परियोजना कटनी-दमोह 4 लेन सडक़ है, जिसकी लंबाई 107.65 किलोमीटर है और निर्माण लागत 1,745.67 करोड़ रुपए प्रस्तावित है। वहीं उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे 2,418.47 करोड़ रुपए की लागत के साथ सबसे महंगी परियोजना है। भोपाल के लिए भी महत्वपूर्ण सडक़ परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। ईस्टर्न भोपाल बायपास को 6 लेन और वेस्टर्न भोपाल बायपास को 4 लेन स्वरूप में विकसित किया जाएगा। ईस्टर्न बायपास परियोजना की अनुमानित लागत 1,628.18 करोड़ रुपए है।
मंजूरी का इंतजार कर रहीं सात बड़ी परियोजनाएं: राज्य सरकार के समक्ष जिन सात परियोजनाओं के प्रस्ताव भेजे गए हैं, उनकी कुल लंबाई 489.72 किलोमीटर और निर्माण लागत 7,893.03 करोड़ रुपए है। इनमें कटनी-दमोह, सिवनी-बालाघाट, देवास-चापड़ा, मेलुआ चौराहा-मालथौन, तिलवारी-हरदी-जनकपुर तथा मंदसौर-सीतामऊ सडक़ परियोजनाएं शामिल हैं। मंजूरी मिलने के बाद इन पर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
भोपाल-विदिशा फोरलेन को कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार
एमपीआरडीसी की प्रस्तुति में भोपाल-विदिशा फोरलेन परियोजना भी शामिल है। 44.83 किलोमीटर लंबी इस सडक़ की निर्माण लागत 669.43 करोड़ रुपए है। परियोजना को संबंधित स्तर पर अनुमोदन मिल चुका है और अब इसे मंत्रिमंडल की अंतिम स्वीकृति का इंतजार है।
निजी निवेश से तेज होगा विकास
एमपीआरडीसी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के जरिए निजी निवेश आकर्षित कर सडक़ निर्माण को गति देने की रणनीति पर काम कर रहा है। इससे सरकारी वित्तीय बोझ कम होगा और परियोजनाओं का क्रियान्वयन अपेक्षाकृत तेजी से हो सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि सभी मंजूरियां मिलने के बाद सडक़ नेटवर्क विस्तार की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

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