नई गाडिय़ों और दफ्तर सजाने के खर्च पर रोक

मोहन सरकार
  • मोहन सरकार का किफायत का मंत्र

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने सरकारी खर्चों में किफायत बरतने और गैर-जरूरी व्यय को नियंत्रित करने पर जोर दिया है। सरकार की ओर से मंत्री-अधिकारियों के लिए नई गाडिय़ों के प्रस्तावों को मंजूरी नहीं देने और दफ्तरों की सजावट से जुड़े अतिरिक्त खर्च को सीमित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
नई गाडिय़ों के प्रस्तावों को नहीं मिलेगी मंजूरी
सरकार के खर्च नियंत्रित करने के फैसले के तहत मंत्री और अधिकारियों के लिए नई गाडिय़ों की खरीद से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दिए जाने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य मौजूदा संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए सरकारी खर्च को नियंत्रित रखना बताया जा रहा है।
दफ्तर सजाने के लिए भी अतिरिक्त बजट पर रोक
सरकारी कार्यालयों में सजावट और गैर-जरूरी सुविधाओं पर होने वाले खर्च को भी सीमित किया जा रहा है। नए फर्नीचर, सजावटी कार्य या कार्यालयों को नया रूप देने से जुड़े ऐसे प्रस्ताव, जिन्हें जरूरी नहीं माना जाएगा, उन्हें बजट उपलब्ध कराने में प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
महंगे उपकरण और अनावश्यक यात्राओं पर भी नजर
सरकार की किफायत नीति के दायरे में महंगे उपकरणों की खरीद और गैर-जरूरी सरकारी यात्राएं भी शामिल हैं। विभागों से आवश्यकता के आधार पर खर्च करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।
दिसंबर में आ सकता है दूसरा अनुपूरक बजट
बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार दिसंबर में दूसरा अनुपूरक बजट पेश कर सकती है। इसमें विभागों की ओर से भेजे जाने वाले प्रस्तावों की समीक्षा के बाद केवल आवश्यक और प्राथमिकता वाले प्रस्तावों को शामिल किए जाने की संभावना है। इससे सरकार का फोकस गैर-जरूरी खर्चों को सीमित करने और उपलब्ध बजट को जरूरी योजनाओं, विकास कार्यों तथा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में इस्तेमाल करने पर रहेगा। सरकार की इस कवायद का मुख्य उद्देश्य सरकारी खर्च में अनुशासन बढ़ाना और वित्तीय संसाधनों का उपयोग जरूरत के मुताबिक करना है। आने वाले अनुपूरक बजट में किन विभागों और प्रस्तावों को जगह मिलती है।

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