- प्रगणक परेशान, अटक रहा वेरिफिकेशन का काम, अब शासन ने की अपील

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल। प्रदेश में जनगणना के पहले चरण का काम जोर-शोर से चल रहा है लेकिन मकानों की गिनती के दौरान इस बार मैदानी स्तर पर काम कर रहे प्रगणकों और सुपरवाइजरों के सामने एक अजीब संकट खड़ा हो गया है। मकानों की गिनती के लिए ऑनलाइन डेटा भरने वाले कई नागरिक अपनी सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी साझा करने से कतरा रहे हैं। इसके पीछे लोगों के मन में साइबर ठगी और डेटा के गलत इस्तेमाल का डर बैठ गया है, जिससे जनगणना का काम कई जिलों में सुस्त पड़ गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार जनगणना कानून की धारा आठ के तहत गलत जानकारी देना या उत्तर देने से मना करना अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए सजा और जुर्माने का प्रावधान भी है। प्रदेश में मकानों की गिनती और सूची बनाने का यह काम एक मई से शुरू हुआ है जो तीस मई तक चलेगा।
शासन ने दी गोपनीयता की गारंटी
जनता के मन में बैठे इस डर को दूर करने के लिए शासन ने विशेष अपील जारी की है। सरकार ने साफ किया है कि जनगणना के दौरान ली गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय है। जनगणना कानून की धारा पंद्रह के तहत यह डेटा किसी के खिलाफ अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस डेटा का उपयोग किसी को मिल रहे सरकारी लाभों को बंद करने या कोई नया लाभ देने के लिए नहीं किया जाएगा। इसका मकसद केवल सांख्यिकीय आंकड़े जुटाना है। साथ ही, यह जानकारी सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत भी किसी को नहीं दी जा सकती। अब जिलों के कलेक्टरों ने लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए सलाह दी है कि जब भी कोई कर्मचारी आपके घर आए, तो उसका आइडेंटिटी कार्ड जरूर देखें। पहचान सुनिश्चित करने के बाद आईडी साझा करने से न केवल समय बचेगा, बल्कि जनगणना में सटीक जानकारी दर्ज हो सकेगी।
7.46 लाख परिवारों की ऑनलाइन जानकारी ठगी के डर ने बढ़ाई मुश्किल
अप्रैल के महीने में सरकार ने आम जनता को जनगणना पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जानकारी भरने की सुविधा दी थी। उस समय प्रदेश के 7.46 लाख परिवारों ने उत्साह दिखाते हुए अपनी जानकारी ऑनलाइन अपलोड की और बदले में उन्हें एक सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी मिली थी। अब जब सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर इस आईडी की मांग कर रहे हैं, तो लोग इसे साझा करने में आनाकानी कर रहे हैं। मंदसौर, छिंदवाड़ा, नीमच और उज्जैन जैसे जिलों से लगातार ऐसी शिकायतें आ रही हैं। लोगों को लगता है कि यह कोई ऑनलाइन फ्रॉड हो सकता है। इस कारण प्रगणकों को या तो दोबारा पूरी जानकारी भरनी पड़ रही है या फिर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और मेहनत दोनों बर्बाद हो रहे हैं। इस बारे में जनगणना निदेशालय ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि उन्हें घर आने वाले प्रगणक को यह आईडी देनी होगी, जिससे उनके द्वारा भरे गए डेटा का वेरिफिकेशन हो सके।
