- मर्चेंट फीस के विरोध में पेट्रोल पंप मालिकों का ऐलान

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
पेट्रोल पंपों पर 2000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर एमडीआर और अन्य ट्रांजेक्शन चार्ज लगाए जाने को लेकर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन मप्र ने विरोध जताया है। यूपीआई ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट फीस के विरोध में पेट्रोल पंप डीलर्स और व्यापारी संगठन मोर्चा खोल रहे हैं। मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने 16 अक्टूबर से 2 हजार से ज्यादा के बिल पर यूपीआई पेमेंट नहीं लेने का फैसला किया है। एसोसिएशन ने इंडियन आयल के मुख्य महाप्रबंधक एवं राज्य प्रमुख अजय श्रीवास्तव को पत्र भेजकर पेट्रोल पंपों पर होने वाले सभी यूपीआई लेन-देन को, राशि की सीमा के बगैर, एमडीआर और किसी भी तरह के ट्रांजेक्शन चार्ज से पूरी तरह मुक्त करने की मांग की है। डीलरों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर उनका मार्जिन निर्धारित और सीमित है। ऐसे में भुगतान की राशि के आधार पर लगने वाला शुल्क सीधे उसकी कमाई से कटता है। एसोसिएशन ने इंडियन आयल के साथ ही एचपीसीएल और बीपीसीएल के संबंधित अधिकारियों को भी पत्र भेजकर इस व्यवस्था में तत्काल हस्तक्षेप और स्क्रायी समाधान की मांग की है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह ने पत्र में कहा है कि पेट्रोल पंपों पर 3000, 5000 और 10,000 तक के डिजिटल भुगतान सामान्य हैं। ग्राहक किस माध्यम से भुगतान करता है, इससे डीलर को मिलने वाला प्रति लीटर मार्जिन नहीं बदलता। इसके बावजूद यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से ज्यादा राशि के लेन-देन में डीलर की वास्तविक कमाई और घट जाती है।
पांच रुपये का शुल्क भी साल भर में बन सकता है बड़ा बोझ
डीलर्स एसोसिएशन ने तर्क दिया है कि पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में डिजिटल लेन-देन होते हैं। ऐसे में प्रति ट्रांजेक्शन पांच रुपये जैसा छोटा शुल्क भी महीने और साल के स्तर पर बड़ी अतिरिक्त लागत में बदल सकता है। वहीं प्रतिशत आधारित एमडीआर का असर अधिक राशि वाले ईंधन लेन-देन पर और बढ़ सकता है। कर्मचारियों के वेतन, बिजली, रखरखाव, सुरक्षा और वैधानिक अनुपालनों की लागत पहले ही बढ़ रही है। एसोसिएशन ने डिजिटल भुगतान नीति को लेकर भी सवाल उठाया है। सरकार और बैंकिंग व्यवस्था डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे रही है, जबकि पेट्रोल पंप भी ग्राहकों को यूपीआई सुविधा दे रहे हैं। ऐसे में डीलरों के सीमित मार्जिन से ने अतिरिक्त शुल्क काटना विरोधाभासी स्थिति पैदा करता है। एसोसिएशन आशंका जताई कि शुल्क व्यवस्था जारी रहने पर डीलरों पर बड़े यूपीआई भुगतान को लेकर अतिरिक्त लागत का दबाव बढ़ सकता है।
डीलरों की प्रमुख मांगें
राशि की सीमा के बिना सभी यूपीआई लेन-देन को एमडीआर और ट्रांजेक्शन चार्ज से मुक्त किया जाए। 2000 से अधिक के भुगतान पर लगने वाले प्रतिशत आधारित एमडीआर और फिक्स्ड प्रति-ट्रांजेक्शन शुल्क से पेट्रोल पंपों को विशेष छूट मिले। पेट्रोलियम रिटेलिंग की उच्च ट्रांजेक्शन संख्या और सीमित डीलर मार्जिन को देखते हुए स्थायी विशेष व्यवस्था बनाई जाए। संबंधित विभागों और वित्तीय संस्थाओं को निर्देश देकर डीलर के निर्धारित मार्जिन में डिजिटल भुगतान के कारण कटौती नहीं होने दी जाए।
डीलरों का तर्क: लेन-देन बढ़े, मार्जिन नहीं: पेट्रोल-डीजल पर डीलर का मार्जिन बिक्री मूल्य के साथ उसी अनुपात में नहीं बढ़ता। अजय सिंह का कहना है कि 10,000 का यूपीआई भुगतान होने पर भी डीलर को प्रति लीटर निर्धारित मार्जिन ही मिलता है, लेकिन यदि भुगतान पर एमडीआर प्रतिशत के हिसाब से कटता है तो वास्तविक कमाई घट जाती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 4700 पेट्रोल पंप हैं। यदि एक पंप पर रोज औसतन 100 ऐसे ट्रांजेक्शन माने जाएं, तो महीने में करीब 17,400 रुपये का अतिरिक्त अधिभार पड़ेगा।
