
- पटवारी काम पर लौटे, लेकिन योजना से बनाई दूरी, कहा-
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश मैं पटवारियों का आंदोलन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन राज्य सरकार, प्रशासन और पटवारियों के बीच का तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। सात दिनों तक चले आंदोलन के बाद सोमवार से प्रदेशभर के पटवारी अपने काम पर लौट आए हैं, जिससे आम जनता से जुड़े काम शुरू हो गए हैं, लेकिन सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना का काम फिलहाल ठप ही नजर आ रहा है। पटवारी संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक हाल ही में बर्खास्त किए गए 55 पटवारियों का बहाली आदेश जारी नहीं होता, तब तक वे इस योजना के तहत कोई कार्य नहीं करेंगे। शुक्रवार की रात सीएम डॉ मोहन यादव, कर्मचारी कल्याण आयोग के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा, भारतीय मजदूर संघ के प्रांतीय संगठन मंत्री कुलदीप सिंह, मप्र पटवारी संघ और प्रांतीय पटवारी संघ के बीच हुई चर्चा में यह सहमति बनी थी कि पटवारियों को न केवल योजना के तहत कानूनी संरक्षण दिया जाएगा, बल्कि बर्खास्त पटवारियों को भी सेवा में वापस ले लिया जाएगा।
पटवारियों को अनुशासनहीनता के आरोप में किया गया था टर्मिनेट
आंदोलन की शुरुआत तब हुई जब स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री कराने के अधिकार पटवारियों और तहसीलदारों को दिए गए। नियम के अनुसार इन जमीनों की रजिस्ट्री में निष्पादक के तौर पर पटवारी या रजिस्ट्री कराने वाले का नाम दिया जाना है। पटवारी दावा कर रहे हैं कि 48 लाख से अधिक रजिस्ट्री में से अगर कुछ मामले कोर्ट तक जाएंगे, तो निष्पादक के तौर पर उन्हें बार-बार कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने होंगे। पटवारियों की मांग थी कि उन्हें स्वामित्व योजना के तहत काम करने के एवज में कानूनी संरक्षण दिया जाए। इसके बाद पटवारी आंदोलन के लिए सडक़ों पर उतर गए थे। शनिवार को सीएम के साथ हई चर्चा के बाद पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने की सहमति बनी थी, जिसके बाद उन्होंने सोमवार से काम पर लौटने का ऐलान किया था। इस दौरान सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए हड़ताल में शामिल अनुशासनहीनता के मामलों में कार्रवाई करते हुए प्रदेश भर के 55 पटवारियों को बर्खास्त कर दिया है। पटवारियों ने सीएम से चर्चा के दौरान साफ कहा था कि इन बर्खास्तगी के आदेशों को निरस्त किया जाना चाहिए। हालांकि सोमवार को भी बर्खास्तगी आदेश निरस्त नहीं हो सके, जिसके कारण पटवारी नामांतरण, सीमांकन और आय जाति प्रमाण पत्र बनाने के काम पर तो लौट आए हैं, लेकिन उन्होंने स्वामित्व योजना के बहिष्कार का अपना निर्णय बरकरार रखा है।
अब तक जारी नहीं हुए सरकारी आदेश
प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी सैनी के अनुसार पटवारी सोमवार से अपना काम शुरू कर चुके हैं, लेकिन स्वामित्व योजना का काम उन्होंने शुरू नहीं किया है। सैनी के मुताबिक अब सरकार द्वारा 55 पटवारियों की बर्खास्तगी निरस्त किए जाने के औपचारिक आदेश का इंतजार किया जा रहा है और उसके बाद ही स्वामित्व योजना का काम शुरू किया जाएगा। गौरतलब है कि स्वामित्व योजना केंद्र और राच्य सरकार की एक बेहद अहम योजना है, जिसके तहत गांवों में ड्रोन के जरिए आबादी क्षेत्र की मैपिंग कर संपत्तियों के अधिकार अभिलेख तैयार किए जाते हैं। इस योजना में मैदानी स्तर पर पटवारियों की भूमिका सबसे अहम होती है, क्योंकि जमीन का सत्यापन और दस्तावेजों की तैयारी के साथ रजिस्ट्री भी उन्हीं के जिम्मे है। पटवारियों के इस योजना से दूरी बना लेने के कारण गांवों में संपत्तियों के सर्वे और मालिकाना हक देने की प्रक्रिया अब भी थमी हुई है।
