भोपाल में खुले तेल का कारोबार , सस्ते के चक्कर में सेहत से समझौता

  • टंकियों से पाइप के जरिए दुकानों तक पहुंच रहा तेल
  • पैकिंग और लेबलिंग के नियमों की निगरानी पर सवाल
  • गौरव चौहान
खुले तेल का कारोबार

बाजार में छह से आठ रुपये प्रति लीटर की बचत का लालच खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा सवाल बनता जा रहा है। भोपाल के पुराने और थोक बाजारों में खुले खाद्य तेल की बिक्री धड़ल्ले से होने का दावा किया जा रहा है। आजाद मार्केट, जुमेराती, हनुमानगंज और करोंद सहित कई क्षेत्रों में रोजाना करीब 35 हजार लीटर खुला तेल बिकने की बात सामने आई है। कुछ कारोबारी भवनों में हजारों लीटर क्षमता वाली टंकियों में तेल जमा कर रखते हैं। इसके बाद पाइप के जरिए दुकानों तक तेल पहुंचाकर ड्रम भरे जाते हैं।
खाद्य तेल का यह कारोबार ऐसे समय में सवालों के घेरे में है, जब उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद की गुणवत्ता, उसकी पहचान और मिलावट से सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। खुले तेल में यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि तेल किस कंपनी का है, उसकी वास्तविक संरचना क्या है और उसे किस तरह संग्रहित किया गया। हालांकि, खुले तेल की बिक्री के आंकड़े और संबंधित कारोबारियों की गतिविधियों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि खाद्य तेल की बिक्री में पैकेजिंग, लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। यदि तेल बिना आवश्यक पहचान और गुणवत्ता संबंधी जानकारी के बेचा जा रहा है, तो उपभोक्ता के लिए उत्पाद की प्रामाणिकता जांचना कठिन हो जाता है।
चार हजार लीटर तक की टंकियों में भंडारण
पुराने भोपाल के कुछ बाजारों में खुले तेल के भंडारण और वितरण का तरीका भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि कुछ भवनों में करीब चार हजार लीटर क्षमता वाली टंकियां रखी गई हैं। इन टंकियों से पाइपलाइन के जरिए तेल दुकानों तक पहुंचाया जाता है और वहां ड्रम भरकर बिक्री की जाती है। इस व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण सवाल तेल की आपूर्ति से लेकर अंतिम बिक्री तक की निगरानी का है। तेल कहां से आया, किस ब्रांड या निर्माता का है, उसकी गुणवत्ता की जांच कब हुई और भंडारण के दौरान स्वच्छता के मानकों का पालन किया गया या नहीं—इन बिंदुओं की जांच जरूरी है। बड़े पैमाने पर कारोबार होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। केवल दुकान पर तेल का नमूना लेना ही पर्याप्त नहीं होगा। आवश्यकता पडऩे पर आपूर्ति करने वाली इकाइयों, भंडारण स्थलों, बिलों और वितरण व्यवस्था की भी जांच करनी होगी।
सस्ता तेल, लेकिन मिलावट की आशंका
खाद्य तेल में मिलावट का जोखिम उपभोक्ताओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है। मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और सरसों जैसे तेलों में सस्ते तेल या अन्य पदार्थों की मिलावट की आशंका की जांच की जा सकती है। पाम ऑयल, कॉटनसीड ऑयल और आर्जीमोन ऑयल जैसे पदार्थों का उल्लेख भी इस संदर्भ में किया जा रहा है, लेकिन किसी विशेष तेल में मिलावट की पुष्टि केवल प्रयोगशाला जांच से ही की जा सकती है। तेल की मिलावट हमेशा देखकर या सूंघकर पहचानना संभव नहीं होता। कुछ तेलों का रंग और प्रकृति एक जैसी हो सकती है। इसलिए संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा विधिवत नमूना लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच कराना जरूरी है। आर्जीमोन तेल विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि खाद्य तेल में इसकी मिलावट से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, तेल में ट्रांस फैट की मात्रा और उसकी गुणवत्ता का आकलन भी वैज्ञानिक जांच से ही किया जाना चाहिए। केवल सस्ता होना किसी तेल के मिलावटी या असुरक्षित होने का प्रमाण नहीं है, लेकिन बिना उचित पहचान और गुणवत्ता नियंत्रण के बिक्री उपभोक्ताओं के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।
छह से आठ रुपये की बचत से बढ़ता है कारोबार
खुले तेल के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पैकिंग वाले तेल की तुलना में खुला तेल छह से आठ रुपये प्रति लीटर तक सस्ता पड़ता है। घरेलू उपभोक्ता के लिए यह अंतर सीमित दिखाई दे सकता है, लेकिन होटल, रेस्टोरेंट, नमकीन निर्माता और कैटरिंग कारोबारियों के लिए बड़ी मात्रा में खरीद के कारण यह बचत काफी बढ़ जाती है। यही वजह है कि थोक में तेल खरीदने वाले कुछ कारोबारी कम कीमत वाले विकल्पों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। लेकिन कीमत का अंतर तभी वास्तविक लाभ माना जा सकता है, जब तेल की गुणवत्ता, उसकी पहचान और खाद्य सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन सुनिश्चित हो। खरीदार को यदि तेल के निर्माता, बैच, निर्माण तिथि, उपयोग की अवधि और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होती, तो किसी शिकायत की स्थिति में जिम्मेदार आपूर्तिकर्ता तक पहुंचना भी कठिन हो सकता है। इस कारण सस्ती खरीद के साथ बिल, उत्पाद की पहचान और गुणवत्ता के दस्तावेजों की जांच भी महत्वपूर्ण है।
टैंकर से बाजार तक पहुंचता है तेल
जानकारी के मुताबिक, भोपाल के बाजारों में खुला तेल मंडीदीप और आसपास की ऑयल इकाइयों से टैंकरों के जरिए लाया जाता है। जिले में 32 स्थानीय तेल ब्रांड होने की बात भी कही जा रही है। हालांकि, तेल की आपूर्ति के बाद उसकी पैकिंग किए बिना टंकियों से ड्रमों में भरकर बिक्री किए जाने के दावों की आधिकारिक जांच जरूरी है। यदि किसी तेल की आपूर्ति किसी पंजीकृत या अधिकृत ब्रांड के नाम पर होती है, तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बिक्री के दौरान भी उसकी पहचान और संबंधित नियमों का पालन हो रहा है। केवल किसी ब्रांड का नाम होना उत्पाद की गुणवत्ता का पर्याप्त प्रमाण नहीं है। खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में निर्माता से लेकर थोक विक्रेता और खुदरा कारोबारी तक की जवाबदेही महत्वपूर्ण होती है। इसलिए जांच में आपूर्ति के बिल, स्टॉक रजिस्टर, निर्माता की जानकारी और खाद्य सुरक्षा संबंधी दस्तावेजों का मिलान किया जाना चाहिए।
नियमों के पालन पर विभाग की नजर
जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक पंकज श्रीवास्तव के अनुसार, खाद्य तेल के कारोबार को लेकर टीम ने जांच की है और दोबारा जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान बनाकर काम किया जा रहा है और खाद्य नियमों तथा शासन के निर्देशों के अनुसार कारोबार सुनिश्चित कराया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगामी जांच में किन बाजारों और भंडारण स्थलों को शामिल किया जाता है। खुले तेल की बिक्री, भंडारण, उत्पाद की पहचान और गुणवत्ता संबंधी नियमों के पालन की स्थिति सामने आने पर ही कार्रवाई का दायरा स्पष्ट हो सकेगा।
सवाल केवल खुले तेल का नहीं, उपभोक्ता के अधिकार का भी
खाद्य तेल रोजमर्रा के भोजन का प्रमुख हिस्सा है। ऐसे में इसकी गुणवत्ता से जुड़ी किसी भी आशंका को गंभीरता से लेना जरूरी है। उपभोक्ता को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि वह किस प्रकार का तेल खरीद रहा है और उसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है। प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि बाजार में उपलब्ध तेल की आपूर्ति और बिक्री की जांच नियमित रूप से हो। जहां नियमों का उल्लंघन मिले, वहां प्रमाणों के आधार पर कार्रवाई की जाए। वहीं, मिलावट के संदेह वाले मामलों में प्रयोगशाला जांच के नतीजों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाए। 35 हजार लीटर रोजाना खुले तेल की बिक्री का दावा सही है तो यह खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए व्यापक जांच का विषय है। विभाग को बाजारवार कारोबार, तेल की आपूर्ति के स्रोत, नमूनों की जांच और नियमों के उल्लंघन पर की गई कार्रवाई का विवरण सामने लाना चाहिए, ताकि सस्ते तेल के कारोबार में उपभोक्ताओं की सुरक्षा से समझौता न हो।

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