कानून से ऊपर कोई नहीं…सोम ग्रुप के लाइसेंस रद्द

सोम ग्रुप
  • शराब समूह को सीएम मोहन यादव ने दिया तगड़ा झटका …

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में सुशासन और कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक बार फिर बहुत बड़ा और कड़ा प्रशासनिक संदेश दे दिया है। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेश सरकार ने आबकारी विभाग से जुड़ी एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। राज्य सरकार ने शराब कारोबार से जुड़े बड़े समूह सोम डिस्टिलरीज के आबकारी लाइसेंसों के नवीनीकरण के आवेदन को सीधे तौर पर निरस्त कर दिया है। सरकार के इस कड़े कदम से साफ हो गया है कि प्रदेश में चाहे कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है।
रिन्यूअल कोई अधिकार नहीं, आबकारी आयुक्त का आदेश: मामले में आबकारी आयुक्त द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी संस्था के लाइसेंस का नवीनीकरण कोई स्वचालित प्रक्रिया या अधिकार स्वरूप प्राप्त होने वाली चीज नहीं है। इसके लिए कंपनी के पिछले आचरण, विधिक अनुपालन, नियमों और शर्तों के पालन के साथ-साथ सार्वजनिक हित से जुड़े पहलुओं का कड़ाई से परीक्षण करना जरूरी है। इसी विधिक दृष्टिकोण के तहत मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के नियमों के आधार पर यह बड़ा फैसला लिया गया। बता दें कि यह पूरा मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन था। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया था कि लाइसेंस रिन्यूअल के मामलों का परीक्षण उपलब्ध तथ्यों, कानूनी प्रावधानों और संबंधित पक्ष के पुराने आचरण के आधार पर पूरी तरह स्वतंत्र और कारणयुक्त तरीके से किया जाना चाहिए।
साल 2026-27 के लिए दिया था रिन्यूअल का आवेदन
सोम ग्रुप की विभिन्न इकाइयों ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने अलग-अलग आबकारी लाइसेंसों को रिन्यू करने के लिए सरकार के समक्ष आवेदन पेश किया था। लेकिन सीएम डॉ. मोहन यादव की भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार, नियमों के उल्लंघन और राजस्व अपवंचन के खिलाफ अपनाई गई सख्त नीति के चलते इन आवेदनों को खारिज कर दिया गया।
इन गंभीर वजहों के चलते निरस्त हुआ आवेदन
जांच और निर्णय प्रक्रिया के दौरान सोम डिस्टिलरीज से जुड़े कई पुराने और गंभीर मामले दोबारा फाइलों से बाहर आए। समूह से जुड़े मामलों में पूर्व में अवैध शराब के परिवहन के गंभीर आरोप लगे थे। जांच में फर्जी और कूटरचित परमिटों के उपयोग की बात सामने आई थी। सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने के प्रकरण विभिन्न न्यायालयों के समक्ष पहले से ही विचारित हैं।

Related Articles