पांच दिवसीय मानसून सत्र होगा हंगामेदार

मानसून सत्र
  • यूसीसी विधेयक पास कराने की तैयारी में सरकार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे तय कर लिए हैं। कांग्रेस जहां नीट परीक्षा विवाद, राज्यसभा चुनाव में कथित गड़बड़ी, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है, वहीं राज्य सरकार का मुख्य फोकस समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक और अनुपूरक बजट को पारित कराने पर रहेगा। ये इस बात के संकेत है कि इस बार मानसून सत्र काफी हंगामेदार होगा।
जानकारों का मानना है कि इस बार सदन में सबसे ज्यादा चर्चा यूसीसी और नीट परीक्षा को लेकर हो सकती है। हालांकि कांग्रेस यूसीसी का तीखा विरोध करने से बच सकती है और अपने हमलों का केंद्र युवाओं तथा रोजगार से जुड़े मुद्दों को बनाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही संकेत दे चुके हैं कि मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया जाएगा। सरकार की कोशिश 25 जुलाई तक इसे विधानसभा से पारित कराने की है। भाजपा इसे सामाजिक समानता और कानूनी एकरूपता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
कांग्रेस का फोकस नीट और बेरोजगारी
कांग्रेस ने सत्र के लिए जिन मुद्दों को प्रमुखता से चुना है, उनमें नीट परीक्षा में कथित अनियमितताएं, राज्यसभा चुनाव में नामांकन निरस्त होने का विवाद, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और किसानों की समस्याएं शामिल हैं। पार्टी रणनीतिक रूप से यूसीसी को मुख्य मुद्दा बनाने से बच रही है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यूसीसी पर अत्यधिक आक्रामक रुख अपनाने से सामान्य मतदाताओं के बीच गलत संदेश जा सकता है और इसका राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल सकता है।
यूसीसी का प्रारूप तैयार, जनता से मांगे जा रहे सुझाव
समान नागरिक संहिता के लिए गठित समिति, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, प्रारंभिक मसौदा तैयार कर चुकी है। अब ऑनलाइन माध्यम से आम जनता से सुझाव और राय ली जा रही है। प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधानों को एक समान कानूनी ढांचे में लाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण उत्पन्न कानूनी जटिलताओं को कम करना बताया जा रहा है।
जनजातीय समुदाय को प्रस्तावित छूट
यूसीसी के मसौदे में अनुसूचित जनजातीय समुदाय को विशेष छूट देने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। इसके तहत जनजातीय समाज अपनी पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्थाओं के अनुसार संचालित होता रहेगा और यूसीसी की परिधि से बाहर रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही प्रावधान कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है। प्रदेश की बड़ी जनजातीय आबादी को छूट मिलने के कारण कांग्रेस के लिए यूसीसी का व्यापक विरोध करना आसान नहीं होगा।
सत्र में टकराव के आसार
मानसून सत्र भले ही केवल पांच दिन का हो, लेकिन नीट परीक्षा, राज्यसभा चुनाव विवाद, बेरोजगारी और यूसीसी जैसे मुद्दों के कारण सदन में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है। सरकार जहां यूसीसी को ऐतिहासिक सुधार के रूप में पेश करेगी, वहीं कांग्रेस जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगी।

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