
- प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बेहद सादगी से कर रहे पुत्र का विवाह
- तीन जुलाई को पारिवारिक सदस्यों के बीच होगा विवाह, सिर्फ 50 लोग होंगे शामिल
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। आज के दौर में जब विवाह समारोह अपने धन, ऐश्वर्य और प्रतिष्ठा के प्रदर्शन बन गए हैं। राजनीति में कई ऐसे नेता हैं जो अपने पुत्र, पुत्रियों के विवाह में इतना खर्च करते हैं कि ऐसी शादियां चर्चा का बिषय बन जाती हैं। ऐसे में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल से भाजपा के विधायक हेमंत खंडेलवाल का अपने बेटे का विवाह बेहद सादगी से कर रहे हैं। दिलचस्प यह है कि प्रदेश अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर होने के बाद भी उन्होंने बेटे की शादी के निमंत्रण कार्ड ही नहीं छपवाएं हैं। केवल परिवारजनों और करीब के रिश्तेदारों को फोन से सूचना दी गई है। प्रदेश अध्यक्ष द्वारा बेहद सादगी से की जा रही बेटे की यह शादी राजनीतिक और प्रशासनिक वीथिकाओं में इस समय चर्चा का बिषय बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक हेमंत खंडेलवाल के पुत्र का विवाह तीन जुलाई को होना है। इस विवाह समारोह में उन्होंने किसी भी राजनीतिक व्यक्ति, जनप्रतिनिधि अथवा सार्वजनिक जीवन से जुड़े किसी भी व्यक्ति को आमंत्रित नहीं किया गया है। उनकी होने वाली पुत्र वधु बैतूल के ही एक गैरराजनीतिक परिवार से वास्ता रखती है। विवाह कार्यक्रम में केवल दोनों परिवारों के सदस्य एवं निकट संबंधी ही शामिल हो रहे हैं।
हेमंत खंडेलवाल बेहद सादगी पसंद हैं
हेमंत खंडेलवाल के परिवार का मानना है कि विवाह एक पावन संस्कार है, जिसका भाव आत्मीयता और पारिवारिक मूल्यों में निहित है। यह आयोजन भारतीय संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक बेहतर संदेश भी माना जा रहा है। गौरतलब है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बेहद सादगी पसंद हैं और उनकी छवि आम नेताओं से हटकर है। सरकारी तामझाम और सत्ता की चकाचौंध से वे पूरी तरह दूर हैं। अध्यक्ष पद पर आसीन हुए उन्हें एक साल का समय गुरुवार दो जुलाई को पूरा हो रहा है पर उन्होंने अब-तक कोई सरकारी बंगला नहीं लिया है। वे प्रोफेसर कॉलोनी स्थित एक फ्लैट में अब भी रहते हैं और प्रदेश कार्यालय के अलावा यहां भी कार्यकर्ताओं से मिलते हैं।
दुल्हन का परिवार राजनीति से नहीं जुड़ा
जानकारी के अनुसार, दुल्हन बैतूल की रहने वाली हैं और उनका परिवार राजनीति से जुड़ा नहीं है। दोनों परिवारों ने शादी को बिना किसी दिखावे के आयोजित करने का फैसला लिया है। इसी कारण शादी के लिए पारंपरिक छपे हुए इनविटेशन कार्ड भी नहीं बनवाए गए हैं। सभी मेहमानों को व्यक्तिगत रूप से या परिवार के जरिए आमंत्रित किया गया है। परिवार के मुताबिक, उनके लिए शादी केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक पवित्र संस्कार है। इसलिए इस अवसर को सीमित दायरे में अपने प्रियजनों के बीच और पूरी सादगी के साथ मनाया जा रहा है।
