मध्यप्रदेश का बिजली नेटवर्क होगा स्मार्ट

  • भोपाल-इंदौर से शुरुआत, बिना ऑपरेटर होगा संचालन

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश का बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क अब स्मार्ट ग्रिड की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने अत्याधुनिक सब-स्टेशन ऑटोमेशन सिस्टम (स््रस्) लागू करते हुए प्रदेश के एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सब-स्टेशनों को रिमोट कंट्रोल सेंटर से संचालित करना शुरू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत कई सब-स्टेशनों का संचालन अब बिना स्थानीय ऑपरेटर के होगा, जिससे बिजली आपूर्ति की निगरानी, नियंत्रण और फॉल्ट मैनेजमेंट पहले से कहीं अधिक तेज और सटीक हो सकेगा। कंपनी ने फिलहाल भोपाल और इंदौर के दो 132 केवी जीआईएस सब-स्टेशनों को पूरी तरह रिमोट ऑपरेशन से जोड़ दिया है। आने वाले समय में यह व्यवस्था प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों तक विस्तारित की जाएगी।
नई तकनीक लागू होने के बाद संबंधित सब-स्टेशनों पर चौबीसों घंटे ऑपरेटर की जरूरत नहीं रहेगी। कंट्रोल सेंटर से ही उपकरणों की निगरानी, स्विचिंग और संचालन किया जाएगा। इससे मानवीय त्रुटियां कम होंगी, फॉल्ट का पता तेजी से चलेगा और बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनेगी। एमपी ट्रांसको ने भोपाल के 132 केवी जीआईएस ई-8 अरेरा कॉलोनी और इंदौर के 132 केवी जीआईएस महालक्ष्मी नगर सब-स्टेशनों में ऑटोमेशन सिस्टम सफलतापूर्वक लागू कर दिया है। दोनों केंद्र अब पूरी तरह रिमोट कंट्रोल सेंटर से संचालित किए जा रहे हैं।
अब ग्वालियर और जबलपुर की बारी
कंपनी ग्वालियर के 132 केवी फूलबाग जीआईएस और जबलपुर के 132 केवी मधोटाल सब-स्टेशनों में भी ऑटोमेशन तकनीक लागू कर रही है। इसके अलावा भोपाल के अयोध्या नगर और इंदौर के सत्य साई सब-स्टेशनों को भी जल्द रिमोट ऑपरेशन प्रणाली से जोड़ा जाएगा। एमपी ट्रांसको ने अगले चरण में प्रदेश के 14 अतिरिक्त 132 केवी सब-स्टेशनों को इस प्रणाली से जोडऩे की योजना बनाई है। साथ ही भविष्य में बनने वाले सभी नए सब-स्टेशनों में शुरुआत से ही ऑटोमेशन सिस्टम लगाया जाएगा, ताकि पूरा ट्रांसमिशन नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट ग्रिड में बदला जा सके।
क्या होगा फायदा
नई व्यवस्था से कंट्रोल सेंटर से रियल-टाइम निगरानी और संचालन होगा। इससे मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी। फॉल्ट की तेज पहचान और शीघ्र सुधार होगा। बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और गुणवत्ता में सुधार होगा। कम समय में निर्णय और बेहतर ग्रिड प्रबंधन होगा। भविष्य की स्मार्ट ग्रिड तकनीक के लिए मजबूत आधार होगा। एमपी ट्रांसको के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने कहा कि सब-स्टेशन ऑटोमेशन सिस्टम बिजली ट्रांसमिशन क्षेत्र में बड़ा तकनीकी परिवर्तन है। इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। भोपाल और इंदौर में इसकी सफल शुरुआत हो चुकी है और भविष्य में सभी नए सब-स्टेशन इसी तकनीक पर आधारित होंगे। दरअसल, यह केवल तकनीकी अपग्रेड नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क को मानव-निर्भर संचालन से डिजिटल, स्मार्ट और केंद्रीकृत नियंत्रण प्रणाली की ओर ले जाने वाला बड़ा बदलाव है।

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