
- खाद संकट: मंत्री बोले- पोर्टल तो खुलता नहीं, खुला तो मैदान में खाद ही नहीं…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में खाद वितरण के लिए अफसरों की बनाई गई ई-टोकन व्यवस्था पर कैबिनेट में बैठक में मंत्रियों ने ही सवाल खड़े कर दिए। कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने कहा, मैदान में खाद का संकट है। किसानों को जरूरत का खाद नहीं दिया तो वे चढ़ाई कर सकते हैं। समय रहते समाधान निकालना होगा। उनकी बात का राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी और लखन पटेल समेत अन्य मंत्रियों ने भी समर्थन किया।
कहा, कम बारिश के कारण किसान जल्दी बुवाई करना चाहते हैं, ताकि बाद में फसलों को कम पानी देकर पैदावर ली जा सके। क्षेत्रों से खाद नहीं मिलने की शिकायतें आ रही हैं।
मंत्री-सांसद गांवों में मनाएंगे दीपावली
मंत्री और सत्तापक्ष के सांसद-विधायक गांवों में दीपावली मनाएंगे। सरकार ने कलेक्टरों से कहा कि वे ऐसे गांवों-क्षेत्रों का चयन करें, जहां नि:शुल्क रजिस्ट्री से जुड़ा काम शत-प्रतिशत पूरा हो गया हो। आयोजन दीपावली के पहले व बाद में होंगे। हितग्राहियों को रजिस्ट्री की प्रति दी जाएंगी।
जिन्हें करानी है व्यवस्था, वे गिनाने लगे संकट
मंत्री कंषाना को रबी सीजन की बुवाई से पहले खाद, बीज व कीटनाशकों का इंतजाम करना था, लेकिन कई मोचर्चों पर वे सफल नहीं हुए। हाल यह है कि मप्र का रबी प्लान ही तैयार नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने ई-टोकन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। कहा, पोर्टल तो चलता ही नहीं, खुलते ही खाद खुलत हा खाद खत्म हो हो जाती है। किसान किसान टोकन नहीं मिलने की शिकायतें कर रहे हैं।
सरकार दोबारा कराएगी स्वामित्व योजना का सर्वे
वर्षों से आबादी की जमीन पर निवास कर रहे लोगों को मालिकाना अधिकार व दिए जाने वाले पत्रकों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने के लिए दोबारा सर्वे कराया जाएगा। बैठक के बाद कैबिनेट ब्रीफिंग में यह जानकारी मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने दी।
वन्यजीव संरक्षण के लिए 17240 करोड़ मिले
प्रदेश में विकास कार्यों के लिए मोहन सरकार ने 23300 करोड़ रुपए स्वीकृत किए। इनमें 17,240 करोड़ रुपए केवल जंगल व उसमें पाए जाने वाले बाघ, तेंदुए व चीतों समेत दूसरे वन्यजीवों के संरक्षण के लिए दी गई। पन्ना, विदिशा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और उज्जैन की सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने के लिए 4,103.73 करोड़ रुपए दिए गए। वहीं स्वास्थ्य के क्षेत्र में उद्योगों और निवेश के लिए 610 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई। लोकायुक्त संगठन के लिए 573.85 करोड़ और 700 करोड़ नगरीय विकास विभाग व अन्य को दिए।
