
- मप्र में सरकारी नौकरी का बदल रहा ढांचा…नियमित कर्मचारी 4 लाख से भी कम
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भले ही करीब साढ़े सात लाख हो, लेकिन इनमें नियमित कर्मचारियों की हिस्सेदारी लगातार घट रही है। नियमित यानी स्थायी कर्मचारियों की संख्या अब चार लाख से भी कम रह गई है। इसके उलट संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों पर सरकारी विभागों की निर्भरता बढ़ती जा रही है। सरकार ने कर्मचारियों की व्यवस्था को अब तीन प्रमुख श्रेणियों-नियमित, संविदा और आउटसोर्स में वर्गीकृत किया है। इससे सरकारी विभागों में स्थायी कर्मचारियों के बजाय वैकल्पिक मानव संसाधन व्यवस्था का दायरा बढ़ता दिख रहा है।
प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक सरकारी विभागों में करीब 9.50 लाख स्वीकृत पद हैं। इनमें दो लाख से अधिक पद खाली हैं। दूसरी तरफ विभिन्न विभागों में करीब ढाई लाख संविदा और लगभग इतनी ही संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी काम कर रहे हैं। इस स्थिति से सरकारी विभागों के मानव संसाधन ढांचे में बड़ा बदलाव सामने आता है। नियमित पदों पर भर्ती और कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने के बीच जो अंतर बन रहा है, उसे कई विभाग संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों से पूरा कर रहे हैं।
रिटायरमेंट के साथ पद भी खत्म करने की व्यवस्था
नियमित कर्मचारियों की संख्या घटने का एक कारण केवल धीमी भर्ती नहीं है। कई विभागों में कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद उसका स्वीकृत पद ही समाप्त किया जा रहा है। ऐसे में भविष्य में उस पद पर नियमित नियुक्ति की संभावना भी खत्म हो जाती है। इसके अलावा कुछ विभागों में संविदा और आउटसोर्स व्यवस्था को बढ़ाने के लिए पुराने स्वीकृत पदों की समीक्षा कर उन्हें समाप्त किया जा रहा है। इससे नियमित रोजगार के स्थायी अवसरों का दायरा और सीमित हो सकता है।
परिवहन से लेकर चिकित्सा और उच्च शिक्षा तक असर
नियमित कर्मचारियों की कमी का असर कई विभागों के कामकाज पर दिखाई दे रहा है। परिवहन, चिकित्सा, उच्च शिक्षा सहित कई विभागों में नियमित पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। इन रिक्तियों के बावजूद विभागों का काम संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के जरिए संचालित किया जा रहा है। कर्मचारी नेता सुधीर नायक का कहना है कि पिछले दस वर्षों में नियमित सरकारी कर्मचारियों की संख्या लगातार कम हुई है। उनके मुताबिक इससे कर्मचारी संगठनों की आंदोलन क्षमता भले प्रभावित हुई हो, लेकिन इसका दूसरा पहलू विभागों की कार्यक्षमता और स्थायी प्रशासनिक ढांचे पर पडऩे वाला असर है। कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी के मुताबिक नियमित भर्ती की गति और संविदा-आउटसोर्स व्यवस्था के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए आने वाले पांच वर्षों में नियमित कर्मचारियों की संख्या और कम हो सकती है। यानी सरकार की मौजूदा भर्ती प्रक्रिया तेज होने के बावजूद सेवानिवृत्ति और पद समाप्त होने की रफ्तार महत्वपूर्ण रहेगी।
