- पीएमजीएसवाई की 2222 किमी सडक़ों में सिर्फ 755 किमी बनीं
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश के विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के लिए शुरू किए गए पीएम जनमन मिशन में घर और बिजली पहुंचाने के मोर्चे पर काम तेजी से हुआ है, लेकिन इन परिवारों की जिंदगी को आत्मनिर्भर बनाने वाली बुनियादी सुविधाएं अभी पीछे हैं। योजना के तहत बड़ी संख्या में आवास पूरे हो चुके हैं और हजारों घरों तक बिजली पहुंच गई है, लेकिन गांवों को जोडऩे वाली सडक़ें, स्कूल, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क के काम अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं।
पीएम जनमन योजना वर्ष 2023 में शुरू हुई थी। मध्यप्रदेश में यह 5182 जनजातीय गांवों और इनमें रहने वाले करीब 13.85 लाख परिवारों से जुड़ी है। इनमें सहरिया, बैगा और भारिया जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह शामिल हैं। योजना का उद्देश्य केवल पक्के घर उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि इन बसाहटों तक पानी, बिजली, सडक़, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है।
सडक़ के लक्ष्य का सिर्फ एक-तिहाई काम
दूरस्थ जनजातीय बसाहटों को मुख्य मार्गों से जोडऩा योजना की सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के जून तक के आंकड़ों के अनुसार पीएमजीएसवाई के तहत 2221.76 किमी सडक़ें स्वीकृत की गईं, लेकिन अब तक केवल 755 किमी सडक़ें पूरी हो सकी हैं। यानी स्वीकृत लंबाई का करीब एक-तिहाई ही निर्माण पूरा हुआ है। इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच पर पड़ता है। सडक़ नहीं होने से स्कूल, अस्पताल, बाजार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच अब भी कई इलाकों में चुनौती बनी हुई है।
शिक्षा में सबसे बड़ा गैप
योजना की प्रगति में सबसे गंभीर स्थिति शिक्षा के मोर्चे पर सामने आती है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत 106 कार्य स्वीकृत किए गए, लेकिन अब तक इनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ। ऐसे में आवास मिलने के बावजूद बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण और सुगम शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य अधूरा है।
पानी भी आधे गांवों तक नहीं पहुंचा
जल जीवन मिशन के तहत 4829 गांवों को स्वीकृत किया गया था। इनमें से अब तक 2409 गांवों तक ही पानी की सुविधा पहुंच सकी है। यानी आधे से कुछ ही अधिक गांव इस सुविधा से जुड़ पाए हैं। जनमन का लक्ष्य हर घर नल से जल का है, लेकिन दूरस्थ बसाहटों में इसकी पहुंच अभी पूरी नहीं हुई है।
बिजली में तस्वीर बेहतर
बिजली के मामले में योजना की प्रगति दूसरी सुविधाओं की तुलना में बेहतर है। विद्युत मंत्रालय के तहत 30,216 आवासों को विद्युतीकरण के लिए स्वीकृत किया गया था, जिनमें 26,164 घरों तक बिजली पहुंच चुकी है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत स्वीकृत 1370 आवासों में से 1193 का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। वहीं पीएम आवास योजना के तहत 1,89,574 आवास स्वीकृत हुए और इनमें से 1,45,251 आवास पूरे किए जा चुके हैं। इससे साफ है कि घर बनाने और उन्हें रोशन करने का काम अपेक्षाकृत तेज रहा है। डिजिटल कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी जनजातीय इलाकों में बड़ा अंतर दिखाई देता है। योजना के तहत 217 बस्तियों को मोबाइल नेटवर्क से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 99 बस्तियां ही इससे जुड़ सकी हैं।
12/09/2026
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