
- अपनी ही सरकार के मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर उठाए थे सवाल
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। अपनी ही सरकार के मंत्रियों और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताने वाले गुना के भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य को पार्टी संगठन ने भोपाल तलब किया।
शाक्य ने भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा। मुलाकात के बाद विधायक के तेवर पहले की तुलना में नरम नजर आए और उन्होंने संगठन तथा पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया। करीब दो सप्ताह पहले गुना में बिजली संकट को लेकर विधायक पन्नालाल शाक्य स्थानीय नागरिकों और किसानों के साथ बिजली कंपनी के कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बिजली कटौती और अव्यवस्थाओं को लेकर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पर तीखा हमला बोला था। शाक्य ने मंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें नाकारा तक कह दिया था और मुख्यमंत्री से उन्हें हटाने की मांग करने की बात कही थी। विधायक ने जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर भी निशाना साधा था। साथ ही बिजली कंपनी के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार कर्मचारियों के नट-बोल्ट टाइट किए जाएं।
उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था और राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, घटनाक्रम के बाद जिला भाजपा अध्यक्ष ने पूरे मामले की रिपोर्ट प्रदेश संगठन को भेजी थी। इसके बाद प्रदेश भाजपा कार्यालय ने विधायक को भोपाल बुलाकर उनका पक्ष जानने का निर्णय लिया। बुधवार को भाजपा मुख्यालय में हुई मुलाकात के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ने उनसे पूरे मामले की जानकारी ली। मुलाकात के बाद पन्नालाल शाक्य ने कहा कि भाजपा एक परिवार है और परिवार में संवाद होता रहता है।
संगठन और कार्यकर्ता सर्वोपरि हैं
उन्होंने कहा कि संगठन और कार्यकर्ता उनके लिए सर्वोपरि हैं। शाक्य ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल जनता की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी प्रकार का मतभेद नहीं है और सभी मिलकर जनता के हित में काम कर रहे हैं। हालांकि, इस घटनाक्रम को भाजपा संगठन द्वारा अनुशासन और समन्वय बनाए रखने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक मंचों से सरकार और मंत्रियों के खिलाफ दिए जाने वाले बयानों को लेकर सतर्क है और भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए संगठनात्मक स्तर पर संवाद बढ़ाया जा रहा है।
