एक साल बाद भी कर्मचारियों को नहीं मिली राहत

  • हाईकोर्ट में लंबित मामले के कारण प्रमोशन प्रक्रिया ठप
  • एक साल में 10 हजार कर्मचारी बिना पदोन्नति हुए रिटायर
  • गौरव चौहान
कर्मचारियों

17 जून 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को मंजूरी देकर नौ वर्षों से रुकी पदोन्नतियों का रास्ता खोलने का प्रयास किया था। सरकार ने सभी विभागों को 30 जून 2025 तक विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें आयोजित करने के निर्देश भी दिए थे। लेकिन नए नियमों को चुनौती देते हुए सामान्य वर्ग के कुछ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। सुनवाई के दौरान मामला लगातार टलता रहा। 17 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया, लेकिन इसी बीच तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति हो गई। अब नई पीठ के गठन और पुन: सुनवाई के बाद ही फैसला आ सकेगा।
प्रदेश में पदोन्नति से जुड़ा विवाद वर्ष 2016 से न्यायालयों में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के कारण नियमित पदोन्नतियों पर रोक लगी हुई है। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि नए नियमों से रास्ता निकलेगा, लेकिन कानूनी अड़चनों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जानकारी के अनुसार पिछले एक वर्ष में 10 हजार से अधिक कर्मचारी बिना पदोन्नति पाए ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। कई विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों को केवल उच्च पदों का प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है।
भर्ती प्रक्रिया पर भी पड़ा असर
पदोन्नतियां नहीं होने से रिक्त पदों की श्रृंखला नहीं बन पा रही है, जिससे नई भर्तियां भी प्रभावित हो रही हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक ढाई लाख पदों पर भर्ती का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक लगभग 78 हजार पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं, लेकिन कई पद अब भी अटके हुए हैं। 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े विवाद के कारण 13 प्रतिशत पदों पर भर्ती प्रक्रिया पहले से रुकी हुई है। इससे करीब 13 से 14 हजार नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं। वर्तमान में भर्ती प्रक्रिया मुख्य रूप से नवसृजित पदों पर ही चल रही है, जिनमें स्वास्थ्य और ऊर्जा विभाग के पद प्रमुख हैं।
नए पदोन्नति नियमों की प्रमुख बातें
सरकार ने जो नए पदोन्नति नियम बनाए हैं उसके अनुसार एससी के लिए 16 प्रतिशत और एसटी के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे। पहले आरक्षित वर्ग के पद भरे जाएंगे, उसके बाद अनारक्षित पदों पर सभी पात्र उम्मीदवारों को अवसर मिलेगा। आरक्षित वर्ग का पात्र उम्मीदवार नहीं मिलने पर संबंधित पद रिक्त रहेंगे। क्लास-1 अधिकारियों की पदोन्नति मेरिट-कम-सीनियरिटी के आधार पर होगी। क्लास-2 और उससे नीचे के पदों पर सीनियरिटी-कम-मेरिट का सिद्धांत लागू होगा। प्रत्येक वर्ष सितंबर से नवंबर के बीच डीपीसी बैठकें आयोजित की जाएंगी। पात्रता का निर्धारण 31 दिसंबर तक की सेवा स्थिति के आधार पर होगा।
कर्मचारियों में बढ़ रही नाराजगी
करीब एक दशक से पदोन्नति नहीं मिलने और लगातार न्यायिक प्रक्रिया लंबी खिंचने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि समय पर फैसला नहीं आने से सेवा लाभ, वेतनमान और कैरियर प्रगति प्रभावित हो रही है। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के आगामी निर्णय पर टिकी हैं, जिससे प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और हजारों रिक्त पदों का भविष्य जुड़ा हुआ है।

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