
- ओरछा की बैठक से भाजपा ने तय की चुनावी रणनीति
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश भाजपा ने ओरछा में दो दिन तक चले प्रदेश कार्यसमिति के मंथन के जरिए अब अपना फोकस सीधे संगठन के विस्तार और 2028 की चुनावी जमीन मजबूत करने पर केंद्रित कर दिया है। बैठक में तय किया गया कि सरकार की योजनाओं और संगठन के कार्यक्रमों को हर घर तक पहुंचाने के साथ बूथ स्तर तक संगठन को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए कार्यकर्ताओं को सरकार और जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सक्रिय करने की रणनीति बनाई गई है। कार्यसमिति में सिर्फ सरकार की उपलब्धियों का प्रचार करने पर ही जोर नहीं रहा, बल्कि युवा, महिला, किसान, आदिवासी और अनुसूचित वर्गों के बीच संगठन की पकड़ मजबूत करने पर भी मंथन हुआ। भाजपा का प्रयास है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और इसका फीडबैक भी संगठन तक आए।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बैठक के बाद बताया कि अब प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हर तीन महीने में आयोजित की जाएगी। इनमें एक बैठक भोपाल में और दूसरी प्रदेश के किसी अन्य स्थान पर आयोजित करने की योजना है। कोविड काल में कार्यसमिति की बैठक एक दिन तक सीमित रहने के बाद अब पार्टी ने दो दिन की बैठक का फैसला किया है। इसका उद्देश्य केवल औपचारिक बैठक करना नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के संगठन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाकर विचारों का आदान-प्रदान करना है। यह फैसला संगठन के लिहाज से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा अब विधानसभा चुनाव से काफी पहले ही अपने संगठनात्मक ढांचे को लगातार सक्रिय रखने की तैयारी में है।
सरकार की योजनाएं बनेंगी संगठन का सबसे बड़ा संपर्क माध्यम
भाजपा की रणनीति में सरकार की योजनाओं को संगठन के विस्तार से जोडऩे पर खास जोर दिखाई दिया। बैठक में कहा गया कि युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए चल रही योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाया जाए, जबकि गरीब कल्याण की योजनाओं को भी गति दी जाए। इसका सीधा राजनीतिक संदेश यह है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं, बल्कि संगठन के कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी जनता तक पहुंचाया जाएगा। इससे भाजपा बूथ स्तर पर अपने जनसंपर्क को लगातार सक्रिय रखना चाहती है।
2027 में महिला वोट बैंक पर नजर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार के अगले वर्षों की प्राथमिकताएं भी सामने रखीं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष और 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। वहीं 2027 को माता-बहनों के सशक्तिकरण और कल्याण के लिए समर्पित करने की बात कही। 2028 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले महिला केंद्रित योजनाओं और कार्यक्रमों पर बढ़ता फोकस भाजपा की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा सकता है।
कांग्रेस पर हमला, भाजपा ने समरसता को बनाया राजनीतिक हथियार
बैठक में सामाजिक समरसता को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर वर्ग संघर्ष और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। इसके मुकाबले उन्होंने भाजपा को सामाजिक समरसता और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की विचारधारा वाली पार्टी बताया। भाजपा अब समरसता संकल्प के कार्यक्रमों को सत्ता और संगठन के संयुक्त प्रयास से व्यापक स्तर पर आयोजित करने की तैयारी में है। यानी सामाजिक मुद्दों को भी संगठनात्मक कार्यक्रमों से जोड़कर जमीनी स्तर तक ले जाने की योजना है।
वरिष्ठ नेताओं को चेतावनी—कार्यकर्ताओं से संवाद न टूटे
समापन सत्र में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश ने नेताओं, मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों को कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद बनाए रखने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद खत्म नहीं होना चाहिए। उनका संदेश संगठन के भीतर की एक अहम चुनौती की ओर भी इशारा करता है—सत्ता में आने के बाद सरकार और संगठन के बीच कार्यकर्ताओं की भूमिका कमजोर न हो। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि बूथ स्तर का कार्यकर्ता खुद को संगठन की निर्णय प्रक्रिया और सरकार के कामकाज से जुड़ा महसूस करे।
ओरछा से निकला संदेश-अब लगातार चलेगा संगठन
हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा ओरछा में केवल बैठक करने नहीं आई थी, बल्कि नई दिशा और नए संकल्प तय करने आई थी। अब इन संकल्पों को लगातार जमीन पर उतारने की तैयारी है। हर तीन महीने में कार्यसमिति, बूथ स्तर तक संगठन की मजबूती, योजनाओं को घर-घर पहुंचाना और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद—इन फैसलों से साफ है कि भाजपा ने 2028 के चुनाव को अभी से संगठनात्मक अभियान में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। अब असली चुनौती यही होगी कि कार्यसमिति में तय किए गए संकल्प कितनी तेजी से बूथ और गांव-गांव तक पहुंचते हैं और सरकार की योजनाओं का राजनीतिक लाभ भाजपा संगठन में किस तरह बदल पाता है।
