सिंगरौली विकास प्राधिकरण में नियुक्ति का मामला हुआ दिलचस्प

सिंगरौली विकास प्राधिकरण
  • राज्य सरकार में चल रहे नियुक्तियों के दौर में चौंकाने वाला मामला

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राज्य सरकार में चल रहे नियुक्तियों के दौर में एक चौंकाने वाला मामला आया है। सिंगरौली विकास प्राधिकरण के लिए राज्य सरकार ने नया अध्यक्ष तय भी नहीं किया और प्रदेश में नियुक्ति आदेश भी जारी हो गया। यह फर्जी आदेश इतनी सफाई से तैयार किया गया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल सहित भाजपा के दिग्गजों ने नए अध्यक्ष को बधाई दे दीं। उप मुख्यमंत्री ने तो नए अध्यक्ष को मिठाई तक खिला दी। अब इसकी सच्चाई सामने आई है। राज्य शासन से कोई आदेश ही जारी नहीं हुआ और बधाई मिठाई लेने वाले अध्यक्ष ही आज तक आदेश का इंतजार कर रहे हैं। निगम मंडलों, आयोग और प्राधिकरणों ताबड़तोड़ हुई नियुक्तियों के बीच सिंगरौली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष का नाम भी सामने आया था। विंध्य निवासी भाजपा नेता वीरेंद्र गोयल को इसका नया अध्यक्ष बताते हुए नियुक्ति आदेश भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह आदेश 1 मई की तारीख का है। आश्चर्य जनक यह है कि वायरल हो रहे पत्र को देख बधाई और मिठाई के दौर चल पड़े। जब प्रदेश के मुखिया सहित सत्ता और संगठन के जिम्मेदार वरिष्ठ जन बधाई दे रहे थे तो वीरेंद्र गोयल को भी कोई शक नहीं रहा। गोयल भी भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और सिंगरौली जिले के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसलिए आदेश में उनका नाम देख कोई और भी शक नहीं कर सका। बधाई का सिलसिला चलता रहा।
आदेश वायरल होने पर ही खुला राज
मजेदार बात यह है कि सोशल मीडिया पर जिस आदेश को देखकर गोयल को बधाई दी जा रही थीं, उसे देखकर ही मंत्रालय में भूचाल आ गया और इस पत्र के फर्जी होने का राज खुल गया। असल में सिंगरौली विकास प्राधिकरण को लेकर मंत्रालय स्तर पर पहले ही एक चूक हो चुकी थी, जिसे जिम्मेदारी अधिकारी दबाए बैठे थे। असल में फरवरी में जारी जिस आदेश में सभी निगम-मंडलों की पुरानी कार्यकारिणी को भंग किया गया था, उसमें अधिकारी सिंगरौली विकास प्राधिकरण का नाम जोडऩा भूल गए थे। ऐसे में जब तक पुराने प्राधिकरण को भंग नहीं किया जाता, तच नए अध्यक्ष की नियुक्ति भी नहीं हो सकती। जब अधिकारियों को अपनी पहली गलती का अहसास हुआ तो ताबड़तोड़ ढंग से नई नियुक्ति के आदेश की पड़ताल की गई। इसमें पकड़ में आया कि पुराना भंग न होने से नए अध्यक्ष की नियुक्ति ही नहीं की गई है।
विभाग बता रहा फर्जी
फर्जी आदेश से सबसे अधिकपरेशान लगरीय विकास विभाग है। विभाग के आला अफसरों ने जांच कटाकर स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। वायरल आदेश फर्जी है। विभाग के अपर मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भी हकीकत से अवगत कराया है। वहीं विपक्ष भी निगम-मंडलों की फर्जी लिस्ट और आदेशों को लेकर सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। पूर्व में निगम-मंडल अध्यक्षों की एक फर्जी सूची भी सामने आ चुकी है।
गोयल भी अब तक गफलत में
सिंगरोली के पूर्व जिला व्यक्ष गोयल अब तक गफलत में हैं। एक तरफ वे सभी से बधाई-मिवाई स्वीकार कर रहे हैं, सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बचाई भी ले रहे हैं। मगर नियुक्ति आदेश उन्हें आज तक नहीं मिला। वे भी सोशल मीडिया पर अपनी नियुक्ति देख रहे हैं। पुराना प्राविकरण भंग न किए जाने से दिलीप शाह आज भी अध्यक्ष हैं। वे भी संशय में हैं कि पिछले दिनों वे क्षेत्र के विकास के लिए करोड़ों के कार्य स्वीकृत करा चुके हैं। नई नियुक्ति हो गई होती तो शासन नए अध्यक्ष से प्रस्ताद लेता।

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