संपदा-2 सॉफ्टवेयर भी नहीं रोक पा रहा भ्रष्टाचार

  • पंजीयन दफ्तर में पहुंची पांच लाख से अधिक रजिस्ट्रियां होल्ड पर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मप्र में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के लिए लाए गए संपदा-2 सॉफ्टवेयर के बावजूद भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों की खबरें सामने आ रही हैं, जो इसके उद्देश्य पर सवाल उठाती हैं।  उप पंजीयक दफ्तरों पर लगातार भ्रष्टाचार की शिकायतें आ रही हैं। उप-पंजीयक कार्यालयों के कर्मचारी अभी भी सेवा प्रदाताओं के माध्यम से रिश्वत ले रहे हैं। जानकारी के अनुसार, प्रदेश में बीते वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 14.50 लाख से अधिक रजिस्ट्रियां हुईं, लेकिन इनमें से पांच लाख से अधिक होल्ड कर की गईं। इनमें से 42,971 ऐसे भी मामले हैं जिनमें रजिस्ट्री को एक दिन से अधिक समय तक होल्ड में रखा गया। गौरतलब है कि संपदा-2 सॉफ्टवेयर को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए हैं। कहा गया था कि संपदा-2 से फर्जी रजिस्ट्री पर रोक लगेगी।  सरकार ने रजिस्ट्री प्रक्रिया को संपदा-2 सॉफ्टवेयर के बाद पारदर्शी होने का दावा जरूर किया, लेकिन उप पंजीयक दफ्तरों पर लगातार भ्रष्टाचार की शिकायतें आ रही हैं।  राजस्व मामलों के जानकारों की मानें तो संपदा-2 सॉफ्टवेयर आने के बाद ऐसे बहुत ही कम कारण हैं, जिनके चलते रजिस्ट्रियों को होल्ड किया जाए। वहीं दूसरी ओर प्रशासन के पास प्रदेश के कई जिलों पर उपपंजीयक कार्यालयों पर भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें पहुंचती रहीं। पंजीयन महानिरीक्षक ने हालही में एक बैठक के दौरान स्पष्ट किया था कि होल्ड यानी बेइमानी दिख रही है। होल्ड में जबलपुर सबसे आगे, जबकि ग्वालियर रीजन दूसरे नंबर पर है।
होल्ड करने के बनाए गए हैं नियम
संपदा-2 सॉफ्टवेयर में होल्ड करने के नियम बनाए गए हैं। यदि दस्तावेज में कोई कमी है तो उप पंजीयक उसे पक्षकार के पास वापस भेजेगा। उस कमी को पूरा करने के लिए कहेगा। यदि उप पंजीयक रजिस्ट्री पक्षकार को वापस नहीं कर रहे हैं तो उसे जिला पंजीयक के पास भेजना होगा। उसे भेजने का कारण भी बताना होगा। वहीं उप पंजीयक इन दोनों विकल्प का उपयोग नहीं कर रहे हैं। इसकी जगह अपनी आईडी पर रजिस्ट्री को होल्ड रख रहे हैं और सौदेबाजी कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में जो दस्तावेज होल्ड किए गए, उसमें सामने आया है कि उप पंजीयक की आईडी पर ही ये लंबित रहे हैं। एक उप पंजीयक को एक दिन में 3 रजिस्ट्री तक होल्ड करने का अधिकार है।
उप पंजीयकों की गतिविधियों से बढ़ी शिकायतें
संपदा-2 सॉफ्टवेयर 1 अप्रैल 2025 से लागू किया गया था। इसके लागू होने से रजिस्ट्री की व्यवस्था बदल गई। हर काम ऑनलाइन हो गया। लेकिन उप पंजीयकों की गतिविधियों को लेकर आरोप लगाना खत्म नहीं हो सका है। प्रदेश में बीते वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 14.50 लाख से अधिक रजिस्ट्रियां हुईं, लेकिन इनमें से पांच लाख से अधिक होल्ड कर की गईं। इनमें से 42,971 ऐसे भी मामले हैं जिनमें रजिस्ट्री को एक दिन से अधिक समय तक होल्ड में रखा गया। इन मामलों से पूरा खेल कुछ इस तरह हुआ है-शैलेंद्र कुमार गोयल ने 16 जनवरी 2026 को सबलगढ़ में रजिस्ट्री के लिए स्लॉट बुक किया। सबलगढ़ के प्रभारी उप पंजीयक ने 18 दिन रजिस्ट्री को होल्ड पर रखा। कथित तौर पर 2 लाख रुपए डिमांड हुई। शिकायत कलेक्टर मुरैना व जिला पंजीयक और डीआईजी दफ्तर ग्वालियर तक की गई। इसके बाद जोश के लिए जिला पंजीयक भी पहुंचे। वहीं कमलेश राजपूत ने उप नगर ग्वालियर में एक मकान क्रय किया। 9 अप्रैल 2025 को वृत्त-1 में वरिष्ठ उप पंजीयक के समक्ष फोटो हो गए। 38 दिन रजिस्ट्री होल्ड रखी। जिला पंजीयक के पास 5 हजार रुपए मांगने की शिकायत पहुंची तो कमर्शियल स्टांप ड्यूटी का केस बनाकर पंजीयक के पास भेज दिया, जबकि मकान आवासीय था।

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