कागजों से बाहर नहीं निकल पा रहीं विकास योजनाएं

  • मप्र में विधायकों पर बढऩे लगा जनता का दबाव…

गौरव चौहान
मप्र में आगामी विधानसभा चुनाव में भले ही अभी दो साल से अधिक का समय बचा है, लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने अभी से चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है। खासकर भाजपा पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। ऐसे में विधायकों पर जनता का दबाव भी बढऩे लगा है। क्योंकि भाजपा सरकार द्वारा चुनाव के समय जारी किए गए संकल्प पत्र और विधायकों के विजन डॉक्यूमेंट के वादे पूरे होने का जनता को बेसब्री से इंतजार है। कारण साफ है, विकास योजनाएं कागजों से बाहर नहीं निकल पा रहीं। गौरतलब है कि विधायकों द्वारा प्रस्तुत विजन डॉक्यूमेंट के माध्यम से किए गए विकास के वादे अब जनता के लिए इंतजार का सबब बन गए हैं। मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में इन वादों को पूरा करने के लिए 4 साल का रोडमैप (2024-2028) तैयार किया गया था, लेकिन अभी तक कई जगहों पर काम की गति धीमी है या भेदभाव के आरोप लग रहे हैं।
हालिया रिपोट्र्स और विधानसभा चर्चाओं से पता चलता है कि जहां सरकारें 2047 तक विकसित भारत/राज्य का रोडमैप पेश कर रही हैं, वहीं विपक्ष और आम जनता पुराने वादों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठा रही है। विजन डॉक्यूमेंट, 15 करोड़ रुपए की अधोसंरचना योजनाएं और खेल स्टेडियम जैसे अहम प्रोजेक्ट अफसरशाही की फाइलों में अटके हुए हैं, जिससे विधायक अपने ही क्षेत्र में सवालों के घेरे में हैं। प्रदेश सरकार ने प्रत्येक विधानसभा के लिए विस्तृत विजन डॉक्यूमेंट तैयार कराया था। इसमें आने वाले वर्षों में क्षेत्र की जरूरतों, विकास योजनाओं और प्राथमिकताओं का पूरा खाका शामिल है। अधिकांश विधायकों ने यह दस्तावेज जमा भी कर दिया, लेकिन क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
समन्वय की कमी और समीक्षा का अभाव
सरकार ने प्रत्येक विधानसभा का विजन डॉक्यूमेंट बनाया। लगभग सभी विधायक इसे फाइल कर चुके हैं। यह डॉक्यूमेंट इस बात का पुलिंदा है कि आने वाले वर्षों में किसी विधानसभा क्षेत्र की क्या जरूरत होगी, वह कैसे पूरी होगी, उसका लाभ किन-किन क्षेत्रों में होगा। इस आधार पर ही संबंधित विधानसभा में सरकार खर्च का रोडमैप बनाएगी। कई जनप्रतिनिधियों का कहना है कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी और समीक्षा के अभाव में यह महत्वपूर्ण योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। इन हालातों में सत्ताधारी दल के विधायकों को विजन डॉक्यूमेंट के कामों को जमीन पर उतरने का बेसब्री से इंतजार है तो कुछ 15 करोड़ के कामों की पहली और दूसरी खेप का इंतजार कर रहे हैं। कई तीसरी खेप के लिए चक्कर काट रहे हैं। जबकि युवाओं में पैठ बनाने वाले खेल मैदान के लिए भी चक्कर लगा रहे हैं। उधर विरोधी दल के कई विधायक जनता के सामने सत्ता की कमजोरियां गिना कर बेचने की जुगत में लगे हैं। विजन डाक्यूमेंट शुरू से ही विवादों में रहा है। विरोधी दल के विधायक भी हर साल 15 करोड़ के काम मांग रहे। खेल मैदान का निर्णय पंचायत विभाग, राजस्व और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के बीच फंसा है। इन विभागों के अधिकारी समन्वय ही नहीं बना पा रहे। सेवानिवृत्त अधिकारियों का कहना है कि विधानसभावार तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट की समीक्षा नहीं हुई, सीएमओ भी इसकी निगरानी नहीं कर पाया, इसलिए काम जमीन पर नहीं उतर सका।
अधिकारियों की निष्क्रियता पड़ रही भारी
सत्ता दल और विपक्ष के कई विधायकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विजन डॉक्यूमेंट तो मंगवा लिया, लेकिन उस पर जिन अधिकारियों की काम करना था, वे नहीं कर पाई। सभी विधानसभाएं एक-दूसरे से जुड़ी है, बड़े कामों की मैपिंग भी होनी है, यह भी काम नहीं हुआ। यही वजह है कि डॉक्यूमेंट के कामों को अमल में नहीं लाया जा रहा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, विजन डॉक्यूमेंट जैसी दीर्घकालिक योजना नियमित समीक्षा के अभाव में प्रभावी नहीं हो सकी। नतीजतन, यह कागजों तक सीमित रह गईं। यदि जल्द ही इन योजनाओं को धरातल पर नहीं उतारा गया, तो आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और बड़ा बन सकता है। विपक्षी दल इसका फायदा ले सकते हैं। जानकारी के अनुसार कई योजनाएं भी सरकार की किरकिरी कर रहीं हैं। अधोसंरचनात्मक विकास योजना के तहत 15 करोड़ रुपए के काम स्वीकृत किए जाने थे। कई विधानसभा को ये काम देरी से मिले, कुछ ने पूरे नहीं किए। इसलिए अगली खेप के काम अटके हैं, जिन्होंने काम कराने में रुचि ली, उन्हें 15 करोड़ के कामों की दूसरी किस्त भी मिल गई। जिन्हें कुछ नहीं मिला ऐसे विपक्षी दल के नेता जनता में इस पर भेदभाव के आरोप लगा रहे हैं। प्रत्येक विधानसभाओं में स्टेडियम बनने हैं। कुछ ने प्रस्ताव तो दिए लेकिन 90 प्रतिशत जमीन की उपलब्धता में अटके हैं। इसलिए प्रस्ताव ही नहीं बने। विधायकों का कहना है कि ये काम हो जाते तो युवाओं में पैठ बनती, लेकिन विभाग के अधिकारी ही रुचि नहीं ले रहे।

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