- सनातन धर्म के साथ ही मप्र संत समिति भी विरोध में आई…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
हर्षा रिछारिया के संन्यास को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संत समाज के पदाधिकारियों ने इस पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे सनातन परंपरा के खिलाफ बताया है। संत समिति के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने कहा कि बार-बार संन्यास लेने की प्रक्रिया को पब्लिसिटी का माध्यम बनाया जा रहा है, जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के कृत्य सनातन धर्म की छवि को खराब करने की कोशिश हैं। अनिलानंद महाराज ने यह भी आशंका जताई कि इस पूरे मामले के पीछे विदेशी फंडिंग जैसी गतिविधियां भी हो सकती हैं, जिसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले प्रयागराज के सिंहस्थ आयोजन को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी और अब उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को भी बिगाडऩे की तैयारी की जा रही है। संत समाज ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस तरह के मामलों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर हर्षा रिछारिया जैसे लोगों पर रोक लगाने की मांग की है। अनिलानंद महाराज ने यह भी कहा कि कुछ दिन पहले तक मॉडलिंग करने के बाद अचानक संन्यास लेना, संन्यास परंपरा का मजाक उड़ाने जैसा है।
आचार्य दातार बोले- मुंडन नहीं कराया, मेकअप में नजर आ रहीं: आचार्य तन्मय वेदका दातार ने कहा- हर्षा का संन्यास जल्दबाजी में कराया गया। इसमें कई पारंपरिक नियमों का पालन नहीं हुआ। आचार्य के अनुसार, संन्यास लेने से पहले 17 प्रकार के पिंडदान किए जाते हैं। इनमें माता-पिता के साथ स्वयं का भी पिंडदान शामिल होता है। इस प्रक्रिया में मुंडन कराना अनिवार्य होता है, लेकिन हर्षा का संन्यास बिना बाल कटवाए ही करा दिया गया। संन्यास लेने के बाद भी हर्षा आम युवतियों की तरह मेकअप और आभूषणों के साथ नजर आ रही हैं।
हर्षा से 50 बार पूछने के बाद ही दीक्षा दी
वहीं, हर्षा को दीक्षा देने वाले सुमनानंद गिरि महाराज ने कहा- संन्यास के दौरान हर्षा ने बाल इसलिए नहीं कटवाए, क्योंकि वह पहले ही एक बार मुंडन करवा चुकी थीं। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के दौरान हर्षा शाही रथ पर सवार हुई थीं, तब किसी ने आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा दी गई दीक्षा के बाद हर्षा, हर्षानंद गिरि के रूप में पूरी तरह संन्यासी बन चुकी हैं। सुमनानंद गिरि ने कहा कि दीक्षा देने से पहले मैंने हर्षा से बार-बार नियमों के पालन को लेकर पूछा। लगभग 50 बार पुष्टि करने के बाद ही मैंने दीक्षा दी। उन्होंने यह भी कहा कि अब हर्षा किसी भी अखाड़े में जाएं, इससे मुझे कोई आपत्ति नहीं है। दीक्षा के समय हर्षा के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे।
हर्षा ने कहा- सत्य के मार्ग पर चलने वालों को परीक्षा देनी पड़ी
उधर, संन्यास लेकर स्वामी हर्षानंद गिरि बन चुकीं पूर्व मॉडल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वह पिछले डेढ़ साल से अपमान सहती आई हैं और अब मानसिक रूप से मजबूत हो चुकी हैं। हर्षा ने कहा- अगर राम ने मेरी किस्मत में संन्यास लिखा है, तो उसे कोई नहीं रोक सकता। इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी ने सत्य और कर्म का मार्ग चुना, उसे विरोध और अपमान का सामना करना पड़ा। उन्होंने यीशु मसीह, गौतम बुद्ध, भगवान राम, सीता और मीरा का उदाहरण देते हुए कहा कि हर युग में सत्य के मार्ग पर चलने वालों को परीक्षा देनी पड़ी है और नारी को तो विशेष रूप से अपमान सहना पड़ा है। हर्षा ने संतों के इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि संन्यास बचपन से ही धारण किया जाता है। उन्होंने कहा- सनातन धर्म में ही महर्षि वाल्मीकि जैसे उदाहरण हैं, जहां व्यक्ति जीवन में कभी भी परिवर्तन कर सकता है। यदि परिवर्तन संभव नहीं, तो फिर ऐसे उदाहरण क्यों बताए जाते हैं।
