
- जरूरी हुआ तो 10 प्रतिशत स्थानांतरण की मिलेगी अनुमति
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र के लाखों अधिकारी-कर्मचारी तबादलों पर से बैन हटने का इंतजार कर रहे हैं। नियमानुसार, वर्ष 2026 के लिए नई तबादला नीति के तहत, सरकार कर्मचारियों के स्थानांतरण पर लगी रोक को मई-जून में हटाया जा सकता है। लेकिन 15 अप्रैल से शुरू हुई जनगणना के कारण तबादलों से रोक हटने पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों-कर्मचारियों में निराशा देखी जा रही है। हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि जरूरी हुआ तो 10 प्रतिशत स्थानांतरण करने की मंजूरी दी जा सकती है। यदि सरकार एक माह के लिए प्रतिबंध हटाने की मंशा जताती है, तो सामान्य प्रशासन विभाग का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि मई के दूसरे या तीसरे सप्ताह में इस संदर्भ का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद की बैठक में लाया जा सकता है, जहां से सहमति बनने के बाद ही तबादले कब से होंगे, इस पर निर्णय होगा।
गौरतलब है कि हर साल नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही अधिकारी-कर्मचारी तबादले की तैयारी करने लगते हैं। लेकिन मप्र में इस वर्ष तबादले के इंतजार में बैठे राज्य के अधिकारी-कर्मचारियों को निराशा हाथ लग सकती है। दरअसल राज्य सरकार इस बार तबादलों पर लगे प्रतिबंध हटाने के मूड में नहीं है। गौरतलब है कि वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने नई तबादला नीति बनाकर अधिकारी-कर्मचारियों के स्थानांतरण किए थे। ढाई महीने यह प्रक्रिया जारी रही थी, लेकिन उसके बाद फिर बादलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। बताया गया है कि यदि इस बार तबादले किए जाते हैं, तो सभी विभागों में कुल तबादलों को कैडर स्ट्रेंथ के सिर्फ 10 प्रतिशत तक सीमित रखा जा सकता है। इसके लिए प्रभारी मंत्रियों को अधिकार मिलेंगे। बताया गया है कि कलेक्टर्स के माध्यम से प्रभारी मंत्रियों को प्रस्ताव भेजे जाएंगे, जिनके अनुमोदन के बाद ही आदेश जारी होंगे। आवेदकों से ऑन लाइन आवेदन मांगे जाएंगे।
विशेष परिस्थितियों में हटाया जा सकता है रोक
कर्मचारियों को इस बार भी जून जुलाई में तबादलों से प्रतिबंध हटने की उम्मीद है। मंत्रियों और विधायकों ने भी मुख्यमंत्री से कुछ दिनों के लिए बैन पर विराम लगाने का आग्रह किया है। हालांकि सीएम ने इस पर अब तक कुछ स्पष्ट आदेश नहीं दिया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अनुराग जैन के साथ बैठक हो चुकी है, जिसमें जनगणना प्रक्रिया जारी होने सहित दूसरे महत्वपूर्ण कार्यों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल तबादले नहीं करने पर सहमति बनी है। लेकिन इस बात पर भी विचार किया गया है कि विशेष परिस्थितियों में एक माह के लिए स्थानांतरण पर लगी रोक को हटाया जा सकता है, लेकिन इसमें केवल 10 प्रतिशत ही तबादले किए जा सकेंगे। सीएम के निर्देश के बाद मुख्य सचिव जैन ने ऐसी संभावनाओं को ध्यान में रखकर सामान्य प्रशासन विभाग से नए सिरे से गाइडलाइन तय करने को कहा है। जीडीए सूत्रों की मानें तो यदि ऊपर से आदेश मिलता है, तो मई या जून माह में एक माह के लिए तबादलों पर लगी पाबंदी पर राहत दी जा सकती है।
आज से शुरू हुआ जनगणना का सर्वे
प्रदेश में 1 मई से जनगणना का सर्वे शुरू होने के कारण कर्मचारियों की व्यस्तता रहेगी, जिसके चलते तबादले जून के आसपास किए जा सकते हैं। बताया गया है कि हर जिले में 15 से 20 प्रतिशत कर्मचारियों की जनगणना में ड्यूटी लगाई गई है। जनगणना का कार्य टाइम बाउंड है और केन्द्र सरकार इसकी लगातार मॉनिटरिंग करती है। इस कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी के लिए राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी। गौरतलब है कि वर्ष 2025 में 4 साल बाद डॉ. मोहन यादव सरकार ने नई तबादला नीति लागू की थी, जिसमें कड़े नियम बनाए थे। इसके चलते कई अधिकारी कर्मचारी स्थानांतरण नहीं करा पाए थे। इनमें से कुछ ने पदस्थापना स्थल पर निर्धारित समय पूरा नहीं किया, जिससे आवेदन निरस्त कर दिए गए थे। इस वर्ष ये कर्मचारी पदस्थापना काल पूरा कर चुके हैं, अब स्थानांतरण चाहते हैं, लेकिन यह मंशा तभी पूरी होगी, जब शासन द्वारा तबादलों पर से प्रतिबंध हटाया जाए।
