
- एमबीबीएएस के साथ डेंटल, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग, की होगी पढ़ाई, नोटिफिकेशन जारी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। जबलपुर की नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल यूनिवर्सिटी के बाद अब उज्जैन में दूसरी मेडिकल यूनिवर्सिटी खोलने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है। इस यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के साथ डेंटल, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग, नेचुरोपैथी, सिद्ध और अन्य विषयों की पढ़ाई होगी। कैबिनेट ने 20 जुलाई को इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए 244 नए पदों की मंजूरी दी थी। इस मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए भेजे गए विधेयक को राज्यपाल ने भी 17 अगस्त को अनुमति दे दी है। विश्वविद्यालय का मुख्यालय उज्जैन में होगा और इसके अधीन भोपाल, इंदौर, उच्जैन संभाग के अधीन आने वाले जिले आएंगे।
ये कॉलेज होंगे शामिल
अधिसूचना के अनुसार अभी तक अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों की शिक्षा अलग अलग जगहों पर चल रही थी। नए विश्वविद्यालय का मकसद है कि राच्य में स्वास्थ्य संबंधी सभी विषयों की शिक्षा का स्तर सुधरे। इसमें डिग्री और डिप्लोमा दोनों स्तर की पढ़ाई शामिल होगी। इसके अलावा इस यूनिवर्सिटी के उद्देश्यों में स्वास्थ्य शिक्षा को समय की जरूरत के मुताबिक बनाना, पढ़ाने और सीखने की प्रक्रिया में सुधार, रिसर्च, परामर्श और निरंतर शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ पुराने छात्रों से संपर्क बनाए रखना भी शामिल है। अधीन आने वाले कॉलेजों में डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाणपत्र देने, परीक्षाएं आयोजित करने, कॉलेजों को संबद्धता देने, हॉस्टल और रिसर्च सेंटर खोलने, दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा का सारा काम नई मेडिकल यूनिवर्सिटी का ही होगा। इस विश्वविद्यालय को ही फीस तय करने, प्रोफेसरों और स्टाफ की नियुक्ति का भी जिम्मा सौंपा गया है।
कुलगुरु की योग्यता भी तय
प्रदेश के राज्यपाल धन्वंतरी मेडिकल यूनिवर्सिटी के पदेन कुलाधिपति होंगे। इस विश्वविद्यालय के कुलगुरु की नियुक्ति के लिए भी प्रदेश सरकार ने नियम तय कर दिए हैं। मेडिकल एजुकेशन में उच्च योग्यता वाले ऐसे व्यक्ति को इस विश्वविद्यालय का कुलगुरु बनाया जाएगा जिसे टीचिंग का भी कम से कम 10 साल का अनुभव होगा। यूनिवर्सिटी के कुलगुरु अधिकतम 4 साल या 70 साल की उम्र तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे। कुलगुरु का चयन कुलाधिपति द्वारा बनाई गई कमेटी के द्वारा सौंपे गए तीन नामों के पैनल में से किया जाएगा। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी अपना फंड बनाएगा जिसमें सरकार की तरफ से अनुदान भी मिलेगा।
तीन क्षेत्रों में बंटेंगे विश्वविद्यालय, भोपाल बना रहेगा मुख्य केंद्र
तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार, भोपाल स्थित वर्तमान आरजीपीवी मध्य भारत क्षेत्र के मुख्य विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करता रहेगा। इसके अलावा, महाकौशल क्षेत्र के कॉलेजों के लिए जबलपुर में और मालवा क्षेत्र के लिए उज्जैन में नए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयों के मुख्यालय स्थापित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस त्रिस्तरीय व्यवस्था से परीक्षा संचालन, परिणाम जारी करने, संबद्धता और निरीक्षण जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अभूतपूर्व तेजी आएगी। इससे पहले राज्य सरकार मेडिकल यूनिवर्सिटी का भी इसी तर्ज पर विभाजन करने का निर्णय ले चुकी है।
