डामर हुआ महंगा…सडक़ों का काम अटका

डामर
  • टेंडर होने के बाद भी काम करने को तैयार नहीं ठेकेदार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब विकास कार्यों पर नजर आने लगा है। क्रूड ऑयल की सप्लाई घटने व कीमतें बढऩे से सडक़ निर्माण में इस्तेमाल होने वाली डामर की किल्लत हो गई है। इसकी सप्लाई करीब 60 फीसदी तक घट गई है, जिससे प्रदेश में चल रहे कई सडक़ निर्माण कार्य या तो बंद हो गए हैं या धीमे पड़ गए हैं। अगले कुछ दिन यही स्थिति रही तो प्रोजेक्ट पूरी तरह रुक जाएंगे। उनकी लागत भी बढ़ जाएगी। मप्र में सडक़ों के निर्माण और मरम्मत का काम टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद ठप है। आलम यह है कि टेंडर होने के बाद भी ठेकेदार काम करने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
गौरतलब है कि दुनिया भर में पेट्रोल एवं डीजल के दाम बढ़ गए हैं, लेकिन भारत में अभी पुराने दाम पर ही बिक्री हो रही है। हालांकि पेट्रोलियम कंपनियों ने डामर के दाम बहुत ज्यादा बढ़ा दिए हैं। 28 फरवरी से 13 अप्रैल के बीच डामर के दामों में दोगुना अंतर आया है। फरवरी में डामर का रेट 54000 रुपए प्रति 1000 किलो था, जो अब बढकऱ 78912 रुपए हो गया है। इतना ही नहीं, डामर की सप्लाई भी देरी से हो रही है। रेट बढऩे से सडक़ निर्माण भी महंगा हो गया है इसलिए ठेकेदारों ने बंद कर दिया है।
600 से ज्यादा सडक़ों का काम प्रभावित
प्रदेश में 600 से अधिक सडक़ों का काम काम प्रभावित हो रहा है। ग्वालियर में पीडब्ल्यूडी एवं नगर निगम द्वारा डामर से बनने वाली लगभग 51 सडक़ों के टेंडर लगाए गए हैं। इनमें 47 टेंडर ग्वालियर नगर निगम में लगे हैं और तीन टेंडर पीडब्ल्यूडी द्वारा लगाए गए हैं। इनमें अधिकतर टेंडर खुल चुके हैं। ठेकेदारों ने अनुबंध भी कर लिए हैं, लेकिन काम शुरू नहीं किए। वर्तमान में डामर का रेट दोगुना हो गया है इसलिए ठेकेदार काम करने से बच रहे हैं। जो बहुत ही ज्यादा आवश्यक कार्य हैं, वहीं ठेकेदार कर रहे हैं। इसके अलावा पैच रिपेयरिंग भी अभी बंद कर दी गई है। ठेकेदारों ने निगमायुक्त को भी बता दिया है कि जो बहुत आवश्यक कार्य हैं, वहीं किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शहर की जर्जर सडक़ों को सही करने के लिए अधिकारियों की बैठक ली थी। इसमें 77 सडक़ों की सूची बताई गई थी। इनमें 34 सडकों का काम पूरा हो चुका है। 20 सडक़ों का काम चल रहा है जिसे फिलहाल बंद कर दिया गया है। सात सडक़ों के अनुबंध हो गए है, लेकिन काम चालू नहीं हुए, जबकि 16 सहकों का अनुबंध अभी नहीं हो पाया है। 108 अन्य सडक़ों के लिए शासन से राशि स्वीकृत होने का इंतजार है।
लगातार बढ़ रहे डामर के दाम
जानकारी के अनुसार, ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से लगातार डामर के दाम बढ़ रहे हैं। ग्वालियर में मथुरा रिफाइनरी से ठेकेदार डाबर मंगाते हैं। फरवरी में डामर का रेट 54 हजार रुपए प्रति हजार किलो था जो अब 78912 रुपए हो गया है। रिफाइनरी में हर महीने की 1 एवं 16 तारीख को डामर का नया रेट खोला जाता है। 28 फरवरी से ईरान-इजरायल का युद्ध शुरू हुआ था और डामर के रेट 7 मार्च से बढ़ गए थे। डामर का एक टैंकर 22 टन का आता है। एक टैंकर पर तीन से चार लाख रुपए बढ़ गए हैं। डामर के टैंकर पर डेढ़ हजार रुपए प्रति टन भाड़ा भी लिया जाता है।  ग्वालियर में डामर मथुरा रिफाइनरी से आता है जबकि भोपाल में बड़ोदरा और मुंबई से डामर मंगाया जाता है।

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