
- 22,500 भर्तियों के बाद भी पुलिस बल की कमी रहेगी चुनौती
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती की तैयारियों के बीच सबसे बड़ी चुनौती केवल रिक्त पद भरने की नहीं, बल्कि बढ़ती आबादी के अनुपात में पुलिस बल का विस्तार करने की भी है। प्रदेश में मौजूदा आबादी की जरूरत के हिसाब से करीब 45 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की आवश्यकता बताई जा रही है। ऐसे में अगले तीन वर्षों में 22,500 आरक्षकों की भर्ती का लक्ष्य भी पुलिस बल की पूरी कमी दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं दिखता। सवाल यह है कि भर्ती के साथ नए पदों के सृजन की दिशा में सरकार कितनी तेजी से कदम उठाती है।
प्रदेश में फिलहाल प्रति एक लाख आबादी पर औसतन 121.76 पुलिसकर्मी उपलब्ध हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 143 है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रति लाख आबादी पर पुलिसकर्मियों के 197 पद स्वीकृत हैं। इससे स्पष्ट है कि पुलिस बल की उपलब्धता और आबादी के अनुपात में जरूरत के बीच अंतर बना हुआ है। इसका असर गश्त, अपराधों की रोकथाम, कानून-व्यवस्था और आपराधिक मामलों की विवेचना जैसे कामों पर पड़ सकता है।
भर्ती का लक्ष्य बड़ा, लेकिन जरूरत उससे भी ज्यादा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अगले तीन वर्षों में आरक्षकों के 22,500 पदों पर भर्ती की घोषणा कर चुके हैं। फिलहाल 9,662 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। यह पहल पुलिस बल की संख्या बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन करीब 45 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की जरूरत के आकलन के सामने भर्ती की मौजूदा योजना से आगे की रणनीति भी जरूरी होगी। भर्ती के आंकड़ों के साथ यह देखना भी अहम होगा कि घोषित पदों में से कितने नए पद हैं और कितने पहले से स्वीकृत रिक्त पदों को भरने के लिए हैं। यदि भर्ती का बड़ा हिस्सा मौजूदा रिक्तियों को भरने में जाता है, तो आबादी के अनुपात में अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत बनी रह सकती है।
2011 से अब तक बढ़ा जरूरत और उपलब्धता का अंतर
वर्ष 2011 की जनगणना के समय मध्य प्रदेश की आबादी करीब 7.60 करोड़ थी। उस समय पुलिस विभाग में लगभग 18 हजार पदों की कमी बताई गई थी। इसके बाद आबादी बढऩे के साथ पुलिस बल की जरूरत भी बढ़ी और अब करीब 45 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की आवश्यकता का आकलन सामने आया है। यह अंतर पुलिस व्यवस्था के सामने दीर्घकालिक योजना की जरूरत को रेखांकित करता है। केवल भर्ती अभियान चलाने के बजाय आबादी, शहरी विस्तार, अपराध के स्वरूप और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा की जरूरत के आधार पर पुलिस बल की नियमित समीक्षा भी जरूरी है।
केंद्र की बैठक के बाद रिक्त पदों पर जोर
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने भोपाल दौरे के दौरान मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में रिक्त पदों को भरने पर जोर दिया था। यह बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान हुई। इससे पुलिस बल की उपलब्धता और रिक्तियों का मुद्दा फिर चर्चा में आया है।पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, पुलिसकर्मियों की उपलब्धता के मामले में प्रदेश की स्थिति कई राज्यों से बेहतर है, लेकिन स्वीकृत पदों और वास्तविक तैनाती के बीच अंतर बना हुआ है। केंद्र सरकार के ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट पर आधारित आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2024 को देश में प्रति एक लाख आबादी पर 197 पुलिसकर्मियों के पद स्वीकृत थे, जबकि वास्तविक उपलब्धता 152.80 थी।
