
- स्वामित्व योजना: पटवारियों की सहमति के बाद आज से शुरू हुआ काम
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत 50 लाख निजी संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य अब सरकार के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन गया है। योजना शुरू होने के 25 दिन बाद सोमवार से पटवारियों ने रजिस्ट्री का काम शुरू किया है, लेकिन निर्धारित एक महीने की समयसीमा में लक्ष्य हासिल करने के लिए अब महज पांच दिन शेष हैं। ऐसे में सरकार के सामने समयसीमा बढ़ाने के अलावा व्यावहारिक विकल्प सीमित नजर आ रहे हैं। योजना 17 सितंबर से शुरू हुई थी। शुरुआती दौर में पटवारियों के विरोध के कारण रजिस्ट्री की प्रक्रिया लगभग ठप रही। अब सरकार और पटवारी संघ के बीच सहमति बनने के बाद काम शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, पांच दिनों में 50 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री कराना कितना संभव होगा, यह बड़ा सवाल है। आधिकारिक स्तर पर समयसीमा बढ़ाने की तैयारी की चर्चा है। दशहरा, दीपावली और अन्य सरकारी अवकाशों को देखते हुए इसे नवंबर के अंत तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा होना बाकी है।
पटवारी संघ का तर्क है कि प्रदेश में सामान्य परिस्थितियों में सालभर में लगभग 10 लाख रजिस्ट्री होती हैं। ऐसे में एक महीने के भीतर 50 लाख रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य व्यावहारिक नहीं है। संघ का कहना है कि संपत्तियों के रिकॉर्ड का सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए, ताकि जल्दबाजी में गलतियां न हों और भविष्य में विवाद की स्थिति न बने। सरकार की चुनौती केवल रजिस्ट्री की संख्या पूरी करने की नहीं, बल्कि प्रक्रिया को सही तरीके से संपन्न कराने की भी है। संपत्ति के विवरण, स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच जैसे कामों में समय लगता है। ऐसे में लक्ष्य पूरा करने के दबाव और कानूनी शुद्धता के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।
दस से ज्यादा बैठकें, फिर भी नहीं निकला था रास्ता
स्वामित्व योजना के तहत काम शुरू कराने के लिए शासन स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने पटवारी संघ के प्रतिनिधियों से चर्चा की। इसके बाद प्रमुख सचिव राजस्व और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सहमति बनाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती बैठकों में समाधान नहीं निकल पाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पांच मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पटवारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसके बावजूद विरोध जारी रहा। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को चेतावनी दी थी कि सात दिन में पटवारियों से काम शुरू नहीं कराया गया तो संबंधित कलेक्टरों को भोपाल बुलाया जाएगा। आखिरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ पटवारी संघ के प्रतिनिधियों की बैठक में सहमति बनने के बाद सोमवार से काम शुरू हुआ है।
सख्ती के बाद सहमति, कार्रवाई वापस लेने का दावा
पटवारियों के विरोध के बीच सरकार ने कार्रवाई भी की थी। करीब 3,500 पटवारियों को नोटिस जारी किए गए, 100 से अधिक को निलंबित किया गया और 29 को बर्खास्त किया गया था। अलग-अलग जिलों में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे कुछ पटवारियों के मामलों में अभियोजन की स्वीकृति भी दी गई थी। मध्यप्रदेश पटवारी संघ का दावा है कि सरकार ने पटवारियों के खिलाफ की गई कार्रवाइयों को निरस्त करने का आश्वासन दिया है और इस संबंध में कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए हैं। संघ के अनुसार, मांगों पर सहमति बनने के बाद प्रदेशभर में सोमवार से स्वामित्व योजना का काम शुरू किया गया है।
मुख्य सचिव की एक महीने की समयसीमा बनी चुनौती
योजना शुरू होने से पहले 15 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में भी पटवारियों के विरोध का मुद्दा उठा था। सूत्रों के अनुसार, 50 लाख रजिस्ट्री कराने के लिए चार से पांच महीने के बजाय एक महीने की समयसीमा तय करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिस पर मुख्यमंत्री ने सहमति दी थी। अब यही समयसीमा प्रशासन के सामने सबसे बड़ी बाधा बन गई है। शुरुआत के 25 दिन विरोध और बातचीत में निकल जाने के कारण लक्ष्य हासिल करने के लिए उपलब्ध समय बेहद कम रह गया है। पटवारी संघ के अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल का कहना है कि 50 लाख रजिस्ट्री के लिए पर्याप्त समय जरूरी है और जल्दबाजी में काम करने से कानूनी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
अब निगाहें समयसीमा बढ़ाने के फैसले पर
पटवारियों के काम पर लौटने से योजना को गति मिलने की उम्मीद है, लेकिन निर्धारित समय में लक्ष्य पूरा होना मुश्किल दिखाई देता है। सरकार के सामने अब दो प्रमुख चुनौतियां हैं-पहली, रजिस्ट्री की प्रक्रिया को प्रदेशभर में प्रभावी ढंग से शुरू कराना और दूसरी, वास्तविक कार्यभार के अनुसार समयसीमा तय करना। नवंबर के अंत तक समय बढ़ाने की संभावना इसी जरूरत से जुड़ी मानी जा रही है। हालांकि, जब तक सरकार औपचारिक आदेश जारी नहीं करती, तब तक मौजूदा समयसीमा में बदलाव को अंतिम नहीं माना जा सकता। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार लक्ष्य को यथावत रखते हुए समय बढ़ाती है या प्रक्रिया के संचालन में कोई अन्य बदलाव करती है।
