एक माह में 40 हजार और अधिकारियों-कर्मचारियों को मिलेगी पदोन्नति

  • मप्र हाईकोर्ट के फैसले के इंतजार के बीच प्रदेश में पदोन्नति की प्रक्रिया जारी

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश में करीब एक दशक बाद शुरू हुई अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। जुलाई माह में 50 हजार से अधिक कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलने के बाद अब सरकार अगले एक महीने में 35 से 40 हजार और अधिकारियों-कर्मचारियों के पदोन्नति आदेश जारी करने की तैयारी में है। इसी के साथ वर्ष 2027 में दी जाने वाली पदोन्नतियों की प्रक्रिया भी समय से पहले शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सितंबर-अक्टूबर में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में 1 जनवरी 2026 को उपलब्ध पदों के आधार पर पदोन्नतियों पर विचार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि गोपनीय चरित्रावली, विजिलेंस क्लीयरेंस और अन्य औपचारिकताएं पहले ही पूरी कर ली जाएं, ताकि भविष्य में पदोन्नति प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।
हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 की वैधता को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में 3 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस मामले में न्यायालय अपना फैसला सुना सकता है। फिलहाल इन नियमों के तहत जारी सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम आदेश के अधीन हैं। सामान्य प्रशासन विभाग का कहना है कि वर्तमान में जो पदोन्नतियां दी जा रही हैं, वे 1 जनवरी 2025 को उपलब्ध रिक्त पदों के आधार पर हैं। चूंकि पिछले 10 वर्षों से पदोन्नति प्रक्रिया रुकी हुई थी, इसलिए विशेष विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) की बैठकें आयोजित कर लंबित मामलों का निराकरण किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण मामले को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया को फिलहाल रतलाम कलेक्टर का कार्यभार ग्रहण करने से भी रोका गया है। वे पदोन्नति नियमों से जुड़े पूरे प्रकरण का समन्वय कर रहे हैं और हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद उनके कार्यभार ग्रहण करने की संभावना जताई जा रही है।
सीपीसीटी की अनिवार्यता से 3 हजार कर्मचारियों की पदोन्नति पर संकट
इधर, प्रदेश के लगभग 3,000 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति पर कंप्यूटर प्रोफिशिएंसी सर्टिफिकेशन टेस्ट (सीपीसीटी) की अनिवार्यता के कारण संकट खड़ा हो गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के 26 मई 2026 के आदेश में असिस्टेंट ग्रेड-3 पद पर पदोन्नति के लिए सीपीसीटी प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया था। इसके बाद कई विभागों ने पहले जारी पदोन्नति आदेश वापस लेना शुरू कर दिया। हाल ही में 22 जुलाई को सामान्य प्रशासन विभाग ने उच्च शिक्षा विभाग को विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा जारी पदोन्नति आदेश निरस्त करने के निर्देश भी दिए हैं। इसी आधार पर उद्योग विभाग 14 कर्मचारियों के पदोन्नति आदेश वापस ले चुका है, जबकि अन्य विभागों में भी पदोन्नति प्रक्रियाएं रोक दी गई हैं।
कर्मचारी संघ ने उठाए सवाल
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने सरकार के इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा है कि वर्ष 2013 और 2015 के सरकारी आदेशों में सीपीसीटी की अनिवार्यता केवल सीधी भर्ती के लिए लागू थी, न कि चतुर्थ श्रेणी से असिस्टेंट ग्रेड-3 पद पर पदोन्नति के लिए। संघ के प्रदेश महासचिव उमाशंकर तिवारी का कहना है कि कई विभागों ने योग्य कर्मचारियों की पदोन्नति रोक दी है, जिससे प्रदेशभर के लगभग 3,000 कर्मचारियों का लंबे समय से प्रतीक्षित पदोन्नति का अवसर प्रभावित हो सकता है। यदि इस मुद्दे पर शीघ्र समाधान नहीं निकला, तो एक ओर जहां हजारों कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी ओर सीपीसीटी की अनिवार्यता के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी इस लाभ से वंचित भी रह सकते हैं।

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