
- अब बनाई पांच साल की कार्ययोजना सरकार खर्च करेगी 1500 करोड़ रुपए
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। बाघ संरक्षण के लिए मध्यप्रदेश में टाइगर रिजर्व का विस्तार लगातार किया जा रहा है, लेकिन इनके कोर क्षेत्रों को मानवीय दखल से मुक्त कराने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है।
टाइगर रिजर्व के भीतर बसे गांवों के परिवारों के पुनर्वास के लिए अब वन विभाग ने पांच साल की कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत करीब 1,500 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। जानकारी के अनुसार टाइगर रिजर्व में 165 गांवों के 18,626 परिवारों को विस्थापन के लिए चिंहित किया गया था। इनमें से 109 गांवों के 9,058 परिवारों का विस्थापन पूरा हो चुका है। जबकि 61 गांवों के 9 हजार 9,979 परिवारों के पुनर्वास को लेकर विभाग गंभीर हो गया है। विभागीय अधिकारियों की माने तो 12 संरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के पुर्नवास के लिये चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए अगले पांच वर्षों का रोडमैप तैयार किया गया है। इसके लिये प्रतिवर्ष सालाना करीब 299.37 करोड़ रुपए खर्च किये जाने की योजना है।
कम नहीं है चुनौतियां
विस्थापन व पुर्नवास को लेकर विभागीय अधिकारियों के सामने कई चुनौतियां है। जिसमें स्थानीय जनजातीय समुदाय रवैया अहम है। यह जल, जंगल और जमीन पर अपने पारंपरिक अधिकारों और पेशा कानून का हवाला देकर विस्थापन का कड़ा विरोध कर रहे हैं। इसके पीछे परिवारों की आजीविका के साधन सीमित होने और पारंपरिक संस्कृति के नष्ट होने जैसी संभावनाओं को भी कारण माना जा रहा है।
संरक्षित क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों पर भी नियंत्रण चाहता है विभाग…
वन विभाग अधिसूचित वन क्षेत्र तक ही नहीं बल्कि इससे जुड़े क्षेत्रों पर नियंत्रण चाहता है। सूत्रों की माने तो इसके लिये विविधवत कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि बाहर के जंगल भी आवागमन और आवास के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए वन्यजीव प्रबंधन को सामान्य वन प्रबंधन से जोडऩे, फील्ड स्टाफ को प्रशिक्षित करने और वन्यजीव कॉरिडोर की कनेक्टिविटी मजबूत करने की जरूरत मानी जा रही है। जिसमें घाटीगांव, सिंघोरी, गांधी सागर, रातापानी, वीरांगना दुर्गावती, नौरादेही, नेशनल चंबल और माधव नेशनल पार्क जैसे गैर-टाइगर रिजर्व क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं।
संरक्षण के साथ पुनर्वास की चुनौती
टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र को वन्यजीवों के लिए निर्बाध बनाने के लिए मानव बस्तियों का पुनर्वास महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए परिवारों को मुआवजा देने के साथ वैकल्पिक बसाहट और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी माना जा रहा है।
