
- बोले- कम रेट पर ठेके और भ्रष्टाचार से बिगड़ रही गुणवत्ता
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश के वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने राज्य की सडक़ों की खराब हालत और गुणवत्ता को लेकर अपनी ही सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि कम रेट पर ठेके देने और भ्रष्टाचार की वजह से सडक़ें जल्द खराब हो जाती है, जिससे आमजनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खस्ता हाल सडक़ को लेकर पीडब्ल्यूडी को निशाने पर लेने वाले पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने सोमवार को सोशल मीडिया के जरिए पोस्ट किया है। जिसमें उन्होंने लिखा कि प्रदेश में पीडब्ल्यूडी और प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत बनी कई सडक़ों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। कम दर पर ठेके लेने, निर्माण में गुणवत्ता से समझौता और भ्रष्टाचार का असर सीधे सडक़ों की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। इस संबंध में उनके द्वारा मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। विश्नोई ने कहा कि ठेकेदार काम लेने के चक्कर में कम दर पर सडक़ बनाने की निविदा हासिल कर लेते है, लेकिन बाद में लागत और मुनाफे का संतुलन नहीं बैठने की वजह वे सडक़ निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर समझौता करते है, जिसकी वजह से सडक़ें जल्द खराब हो जाती है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। विधायक ने एक बार फिर से अपने विधानसभा क्षेत्र पाटन में आने में आने वाले मझौली ब्लॉक की पौड़ा से पचैया सडक़ को लेकर पीडब्ल्यूडी को घेरते हुए कहा कि यह सडक़ लगभग तीन साल से अधिक समय से निर्माणाधीन है, लेकिन अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इस दौरान तीन कॉन्ट्रैक्टर बदले जा चुके हैं। इस सडक़ का भूमिपूजन विभागीय मंत्री ने किया था, लेकिन उनका काम अब तक शुरू नहीं हो पाया। इस तरह मझौली नगर में करीब साढ़े पांच करोड़ रूपए की लागत से बनने वाली सडक़ के लिए अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है, जबकि इसके लिए छह बार टेण्डर आमंत्रित किए जा चुके। हर बार टेण्डर तकनीकी कारणों से अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाते हैं।
प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना की सडक़ों के रखरखाव पर भी सवाल
पूर्व मंत्री ने प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना की सडक़ों के रखरखाव पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संबंधित ठेकेदार कम दर पर काम लेने के बाद पांच साल के रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी नहीं करते। केन्द्र के नए निर्देश के तहत जितने वर्षों का मेंटेनेंस नहीं हुआ है, उतना मेंटनेंस का समय बढ़ा दिया जाए। इस पर कुछ ठेकेदार हाईकोर्ट चले गए, जिससे नई टेंडर प्रक्रिया और पुरानी सडक़ों के सुधार कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले को केवल राजनीतिक विरोध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार बड़ा कारण है। भ्रष्टाचार को लेकर जमीनी स्तर पर गहराई से समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सडक़, पानी और स्थानीय विकास से जुड़ी जो भी समस्याए सामने आती है, तो सबसे पहले लोग विधायक से सवाल करते हैं। लेकिन जब प्रशासनिक स्तर पर काम नहीं होता, तो विधायक खुद को असहाय महसूस करता है, ऐसी समस्या केवल उनकी नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के विधायकों के सामने आ रही है।
भ्रष्टाचार पर भी उठाए सवाल
बिश्नोई ने कहा कि समस्या को केवल राजनीतिक विरोध के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, इसके पीछे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार बड़ा कारण है। उन्होंने सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर इसकी वास्तविकता की गहराई से समीक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करनी है तो ठेके की प्रक्रिया से लेकर निर्माण, भुगतान और मेंटेनेंस तक पूरी व्यवस्था की निगरानी जरूरी होगी। मंत्री और सीएम को कहने के बावजूद सुधार नहीं होने के सवाल पर अजय विश्वनोई ने कहा कि इसका मतलब साफ है कि अजय विश्वनोई कमजोर हो गया है। यानी विधायक कमजोर हो गया हैं।
