यूपीआई को एनपीसीआई ने किया तैयार शुरुआत में 21 बैंकों को इससे जोड़ा था

यूपीआई आज चाय की दुकान से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक भुगतान का सबसे आसान तरीका बन चुका है, लेकिन जिस यूपीआई का इस्तेमाल करोड़ों लोग रोज करते हैं, उसके पीछे काम करने वाली व्यवस्था और इसके नियमों के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने विकसित किया है। एनपीसीआई भारतीय रिजर्व बैंक के नियमन के तहत काम करता है और यूपीआई को तत्काल भुगतान प्रणाली के रूप में तैयार किया गया है। बता दें यूपीआई की शुरुआत 2016 में हुई थी। इसका पायलट लॉन्च 11 अप्रैल 2016 को मुंबई में तत्कालीन आरबीआई गवर्नर डॉ. रघुराम राजन ने किया था। शुरुआत में 21 बैंकों को इससे जोड़ा गया था। अगस्त 2016 से कई बैंकों ने यूपीआई आधारित सेवाएं और ऐप उपलब्ध कराने शुरू किए। इसके बाद यूपीआई का दायरा बढ़ता गया और यह देश के डिजिटल भुगतान तंत्र का अहम हिस्सा बन गया। यूपीआई की सबसे बड़ी खासियत इसकी इंटरऑपरेबिलिटी है यानी अलग-अलग बैंकों के खातों को एक ही भुगतान इंटरफेस के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए ग्राहक को हर बार बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड साझा करने की जरूरत नहीं होती। यूपीआई आईडी या वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के जरिए भी भुगतान किया जा सकता है।

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