
भारत के निजी क्षेत्र के अनुसंधान और विकास में महिला शोधकर्ताओं की भागीदारी केवल 17.8 प्रतिशत है। यह सार्वजनिक संस्थानों में महिलाओं के 21.2 फीसदी प्रतिनिधित्व से काफी पीछे है, यह स्थिति तब है जब अनुसंधान पर खर्च के मामले में उद्योग जगत लगभग सरकार की बराबरी कर रहा है, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की रिसर्च एंड डेवलपमेंट स्टैटिस्टिक्स एट ए ग्लांस 2025-26 की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। निजी क्षेत्र में यह संख्या कम है, फिर भी अनुसंधान कार्यबल में महिलाओं की समग्र भागीदारी में वृद्धि के कारण यह आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं। एक अप्रैल 2024 तक, भारत में 5 लाख से कुछ अधिक पूर्णकालिक शोधकर्ता थे, जिनमें लगभग 1.5 लाख महिलाएं थीं। शोध क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी 2020-21 के 18.6 प्रतिशत से बढक़र 2023-24 में 29 प्रतिशत हो गई है। क्षेत्रवार आंकड़ों का विश्लेषण करने पर निजी उद्योग सबसे निचले पायदान पर नजर आता है।
