देश की हर कोर्ट में बनेंगे महिला वकीलों के लिए अलग टॉयलेट और बार रूम

न्याय की चौखट पर जाकर दूसरों को हक दिलाने वाली महिला वकीलों के लिए खुद अदालतों के भीतर बुनियादी सुविधाएं न होना एक गंभीर और कड़वी हकीकत है। इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी हाई कोर्ट को सख्त आदेश दिया है कि देश की हर एक अदालत में महिलाओं के लिए अलग और सुरक्षित बार रूम और टॉयलेट बनाए जाएं। सीजेआई ने साफ शब्दों में कहा-महिलाओं के लिए बुनियादी ढांचा और सुविधाएं न होने का कोई भी बहाना या औचित्य स्वीकार नहीं किया जा सकता। बार के सभी सदस्यों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्यों और हाई कोर्ट की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। सुनवाई के दौरान एमिकस ने कोर्ट को बताया कि राज्यों द्वारा दाखिल किए गए 16-17 हलफनामों में यह बात सामने आई है कि महिला वकीलों के लिए अदालतों में टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं नाममात्र की हैं या हैं ही नहीं। हरियाणा ने अभी तक इस संबंध में कोई निरीक्षण तक नहीं किया है। पंजाब के 67 जिला अदालत परिसरों में से केवल 9 अदालतों में महिला वकीलों के लिए वॉशरूम उपलब्ध हैं। काउंसलिंग के दौरान वकील मनिका ने ध्यान दिलाया कि कोलकाता जैसी जगह की अदालतों में भी महिला वकीलों के लिए टॉयलेट उपलब्ध नहीं हैं।  

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