
- फसल तैयार, भावांतर का रजिस्ट्रेशन कब होगा पता नहीं
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कटाई शुरू हो गई है, लेकिन जिस भावांतर योजना के सहारे किसान अपनी उपज के बेहतर दाम की उम्मीद लगाए बैठे हैं, उसके पंजीयन को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं है। खास बात यह है कि सरकार ने इस साल धान की खरीदी के लिए 15 सितंबर से पंजीयन शुरू कर दिए हैं, जबकि अक्टूबर में बाजार में आने वाली सोयाबीन के लिए अभी तक पंजीयन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। किसानों को चिंता है कि यदि पंजीयन में और देरी हुई तो मंडियों में सोयाबीन की आवक बढऩे के साथ उन्हें अपनी उपज तत्काल बेचनी पड़ेगी। ऐसे में भावांतर योजना का लाभ मिलने से पहले ही किसान कम दाम पर उपज बेचने को मजबूर हो सकते हैं।
पिछले साल भी सोयाबीन के लिए भावांतर योजना लागू की गई थी। उस समय पंजीयन प्रक्रिया देर से शुरू होने की शिकायतें सामने आई थीं और कई किसान योजना का लाभ नहीं ले सके थे। इस साल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही सोयाबीन के लिए भावांतर योजना जारी रखने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन कृषि विभाग की ओर से पंजीयन को लेकर अब तक दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं।
फसल खेत से निकलने लगी
प्रदेश में सोयाबीन की कटाई शुरू हो चुकी है। किसान अब मंडियों में उपज लेकर पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे समय में उन्हें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि भावांतर योजना के लिए पंजीयन कब शुरू होगा और योजना के तहत भुगतान की प्रक्रिया क्या रहेगी। किसानों का कहना है कि योजना का उद्देश्य ही तब पूरा होगा, जब पंजीयन कटाई और मंडी में आवक शुरू होने से पहले हो जाए। यदि पंजीयन और खरीदी प्रक्रिया में देरी हुई तो जरूरतमंद किसान भावांतर का इंतजार करने के बजाय तत्काल नकद जरूरत पूरी करने के लिए मंडी में उपज बेच सकते हैं।
धान में प्रक्रिया पहले, सोयाबीन में इंतजार
इस बार सरकार ने धान के लिए भावांतर योजना लागू करने की घोषणा की है। धान उपार्जन के लिए किसानों का पंजीयन 15 सितंबर से शुरू हो चुका है और 10 अक्टूबर तक चलेगा। इसके उलट सोयाबीन की फसल अक्टूबर में मंडियों में आना शुरू हो जाती है, लेकिन उसके लिए पंजीयन कब शुरू होगा, इसकी तारीख अभी सामने नहीं आई है। किसानों का सवाल है कि जब सोयाबीन की फसल पहले बाजार में आती है तो उसके पंजीयन की प्रक्रिया धान की तुलना में पीछे क्यों चल रही है।
उड़द खराब, अब सोयाबीन से उम्मीद
इस साल कई इलाकों में सितंबर की बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि मौसम विभाग के कम बारिश के अनुमान को देखते हुए बड़ी संख्या में उन्होंने उड़द की बोवनी की थी, लेकिन सितंबर में लगातार बारिश से उड़द की फसल प्रभावित हुई। सागर जिले के दुगाहा खुर्द के किसान धर्मेंद्र सिंह राजपूत के मुताबिक उन्होंने 25 एकड़ में उड़द बोई थी। बारिश के कारण उत्पादन घटकर करीब 15 क्विंटल रह गया। उनका कहना है कि इससे लागत तक निकलना मुश्किल हो गया है। अब सोयाबीन से उम्मीद है और समय पर भावांतर योजना लागू होने पर किसानों को राहत मिल सकती है।
एमएसपी 5708, मंडी भाव कम हुआ तो अंतर की भरपाई
भावांतर योजना में सरकार मंडी में सोयाबीन की पूरी उपज सीधे नहीं खरीदती। किसान अपनी उपज सामान्य रूप से मंडी में बेचते हैं। इसके बाद सरकार की ओर से मंडियों में सोयाबीन के बिक्री मूल्य के आधार पर मॉडल रेट तय किया जाता है। यदि बिक्री मूल्य तय न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम रहता है तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अंतर की राशि किसानों को डीबीटी के जरिए बैंक खाते में दिए जाने का प्रावधान रहता है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए सोयाबीन का एमएसपी 5708 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। मध्य प्रदेश में इस साल सोयाबीन का रकबा करीब 52.67 लाख हेक्टेयर बताया गया है। इतने बड़े क्षेत्र में उत्पादन होने के कारण योजना की समय पर प्रक्रिया शुरू होना किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।
विभाग में फैसले का इंतजार
कृषि विभाग के स्तर पर फिलहाल पंजीयन की तारीख को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक कृषि विभाग के सचिव निशांत वरवड़े विदेश यात्रा पर हैं और उनके लौटने के बाद प्रक्रिया आगे बढऩे की संभावना है। वहीं कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना से इस संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बैठक में व्यस्त होने के कारण उनसे बात नहीं हो सकी।
किसानों के सामने सीधा सवाल
सोयाबीन उत्पादक किसानों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब खेतों से फसल निकलने लगी है, तो भावांतर योजना का पंजीयन कब शुरू होगा? किसानों का कहना है कि योजना की घोषणा भर से राहत नहीं मिलेगी। पंजीयन, मंडी बिक्री और भुगतान की प्रक्रिया समय पर शुरू होना जरूरी है। पिछले साल की देरी से सबक लेते हुए इस बार सरकार ने समय रहते व्यवस्था नहीं की तो बड़ी संख्या में किसान योजना के दायरे से बाहर रह सकते हैं।
