
- युवाओं से बुद्धिजीवियों तक पहुंचेगी पार्टी
- हर विधानसभा में 200 बुद्धिजीवियों से संवाद और टिफिन बैठकों पर फोकस
भोपाल। संविधान, चुनाव आयोग और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर राहुल गांधी, अभिजीत दिपके और नेहा बोरा की ओर से उठाए जा रहे सवालों के जवाब में भाजपा अब जनसंपर्क और नैरेटिव की लड़ाई को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। पार्टी का फोकस केवल राजनीतिक आरोपों का जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं, पेशेवरों, बुद्धिजीवियों और सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वाले लोगों के बीच अपनी बात पहुंचाने पर है। इसके लिए 93 नारों, 12 पन्नों की बुकलेट, पदयात्राओं, नागरिक गोष्ठियों, टिफिन बैठकों और डिजिटल प्रतियोगिताओं को मिलाकर व्यापक अभियान तैयार किया गया है।
भाजपा की रणनीति में पहली बार नहीं, बल्कि नए सिरे से यह स्पष्ट दिख रहा है कि विपक्ष के राजनीतिक आरोपों का जवाब केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस या बयानबाजी से देने के बजाय सामाजिक और पेशेवर समूहों तक सीधे पहुंचकर दिया जाए। पार्टी का लक्ष्य लोकसभा क्षेत्रवार प्रभावशाली लोगों को जोडऩे से लेकर देशभर में 10 लाख से अधिक युवाओं और पेशेवरों तक पहुंचने का है। विधानसभा स्तर पर 200 चुनिंदा बुद्धिजीवियों से संवाद और लोकसभा क्षेत्रों में 2,000 प्रभावशाली लोगों को जोडऩे की योजना भी इसी रणनीति का हिस्सा है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जबकि केंद्रीय और राष्ट्रीय स्तर के नेता राज्यों में जाकर अभियान की निगरानी करेंगे। इस तरह पार्टी एक साथ राजनीतिक संदेश, संगठनात्मक सक्रियता और जनसंपर्क को साधना चाहती है।
भाजपा के अभियान का एक प्रमुख हिस्सा ‘लोकतंत्र के लिए नागरिक’ नाम से प्रस्तावित गोष्ठियां हैं। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 200 चुनिंदा लोगों को बुलाने की योजना है। इनमें डॉक्टर, वकील, कारोबारी, शिक्षक, प्रोफेसर, सामाजिक कार्यकर्ता और दूसरे पेशेवर शामिल होंगे। इन बैठकों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), वोट चोरी के आरोपों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भाजपा अपना पक्ष रखेगी। एसआईआर के समर्थन में ज्ञापन पर हस्ताक्षर कराने की योजना भी है। इस रणनीति का राजनीतिक महत्व इसलिए है, क्योंकि भाजपा विपक्ष के आरोपों का जवाब केवल अपने कार्यकर्ताओं के बीच नहीं, बल्कि उन वर्गों के सामने भी रखना चाहती है, जिनकी सामाजिक विश्वसनीयता और स्थानीय प्रभाव है। पार्टी की कोशिश है कि चुनाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े विवादों पर उसका पक्ष व्यापक समाज तक पहुंचे। इसके लिए बिप्लब कुमार देब, सतीश पूनिया, स्मृति ईरानी, बैजयंत जय पांडा, पीयूष गोयल, किरेन रिजिजू और अन्य नेताओं को जिम्मेदारी देने की बात सामने आई है।
पदयात्रा से सडक़ पर शक्ति प्रदर्शन
भाजपा ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ के संदेश के साथ पदयात्राओं और रैलियों की भी तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत महानगरों में दो से तीन रैलियां और जिला मुख्यालयों पर एक रैली आयोजित करने की योजना है। बड़े बैनर और प्लेकार्ड के माध्यम से एसआईआर, कथित अवैध घुसपैठ, विपक्ष की राजनीति और सरकार के विकास कार्यों जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे। हरीश द्विवेदी, तरुण चुग, शिवराज सिंह चौहान और भूपेंद्र यादव सहित नेताओं को इस अभियान की जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी है। भाजपा का इरादा इस कार्यक्रम के जरिए अपने राजनीतिक संदेश को सार्वजनिक मंचों तक पहुंचाने और विपक्ष के आरोपों के जवाब में संगठन की सक्रियता दिखाने का है। हालांकि, पदयात्राओं और रैलियों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि उनमें कितनी भागीदारी होती है और अभियान का संदेश आम लोगों तक किस तरह पहुंचता है।
टिफिन बैठकों से स्थानीय नेटवर्क मजबूत करने की कोशिश
भाजपा की योजना का दूसरा अहम हिस्सा सामाजिक संपर्क है। लोकसभा क्षेत्रों में प्रभावशाली लोगों को जोडऩे के लिए टिफिन बैठकें, मंदिरों में मुलाकात और व्यक्तिगत संवाद जैसे तरीके अपनाए जाएंगे। इसके तहत सामाजिक कार्यकर्ताओं, पेशेवरों और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले लोगों को अभियान से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है। पार्टी का जोर ऐसे संपर्कों पर है, जिनके जरिए राजनीतिक संदेश केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समूहों और उनके नेटवर्क के माध्यम से आगे बढ़े। दस लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य इसी व्यापक संपर्क अभियान से जुड़ा है। छात्रों और युवाओं को शामिल करने के लिए निबंध लेखन, भाषण और शॉर्ट वीडियो बनाने जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित करने की भी योजना है। इससे भाजपा राजनीतिक मुद्दों को युवाओं की भागीदारी वाले कार्यक्रमों के साथ जोडऩा चाहती है।
जेन-जी पर खास फोकस, डिजिटल प्लेटफॉर्म भी रणनीति में
भाजपा के अभियान में जेन-जी को अलग महत्व दिया गया है। कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, आईटीआई और प्रमुख कोचिंग संस्थानों में ‘लोकतंत्र के लिए युवा/विद्यार्थी संवाद’ आयोजित किए जाएंगे। इनमें युवाओं और पेशेवरों को जोडऩे के लिए की-नोट संबोधन, संवाद और अन्य कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। देशभर में ऐसे 2,000 कार्यक्रमों के जरिए दस लाख से अधिक युवाओं और पेशेवरों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इस दायरे में आईआईटी और एनआईटी के विद्यार्थियों के साथ इंस्टाग्राम क्रिएटर्स, यूट्यूबर्स, फेसबुक पेज संचालकों और दूसरे सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को भी शामिल करने की योजना है। भाजपा के लिए यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि युवा मतदाताओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय समूहों तक पहुंच बनाने में पारंपरिक राजनीतिक सभाओं से अलग तरीकों की जरूरत है। अश्विनी वैष्णव, मनसुखभाई मांडविया, हेमांग जोशी, अभिनव प्रकाश और अन्य नेताओं से जुड़ी टीमों को प्रतियोगिताओं और युवा संवाद कार्यक्रमों की जिम्मेदारी देने की जानकारी है। स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में प्रतियोगिताएं कराने, ई-सर्टिफिकेट, मेंटरशिप, कार्यशालाओं और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के अवसर उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई गई है।
राष्ट्रीय नेताओं की निगरानी में चलेगा अभियान
अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर नेताओं की अलग-अलग टोलियां बनाई हैं। शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव, पीयूष गोयल, अश्विनी वैष्णव, बिप्लब कुमार देब, सतीश पूनिया, स्मृति ईरानी, बैजयंत जय पांडा और किरेन रिजिजू जैसे नेताओं की भूमिका विभिन्न कार्यक्रमों के संचालन और निगरानी में रहेगी। कुल मिलाकर, भाजपा की रणनीति तीन मोर्चों पर काम करने की है—विपक्ष के आरोपों का जवाब देना, प्रभावशाली सामाजिक समूहों से सीधा संपर्क बनाना और युवाओं के बीच डिजिटल तथा संवाद आधारित पहुंच बढ़ाना। 93 नारों और 12 पन्नों की बुकलेट से तैयार संदेश को पदयात्राओं, गोष्ठियों और सोशल मीडिया के जरिए आगे बढ़ाने की योजना है। अब इस अभियान की असली परीक्षा उसके क्रियान्वयन में होगी। दस लाख युवाओं तक पहुंचने और हर विधानसभा में बुद्धिजीवियों से संवाद के लक्ष्य कितने पूरे होते हैं, यह देखना अहम होगा। साथ ही, संविधान और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर भाजपा का जवाब कितना भरोसा पैदा करता है, इससे भी तय होगा कि पार्टी विपक्ष के नैरेटिव को कितनी प्रभावी चुनौती दे पाती है।
