सावधान! 80 फीसदी कोयला देने वाले राज्यों पर मंडराया संकट

कोयला देने वाले राज्यों

बिच्छू डॉट कॉम। देश में बिजली उत्पादन की प्राथमिकताओं में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदूषण कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत अब पारंपरिक कोयला आधारित बिजली की जगह सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। हालांकि, देश को स्वच्छ ऊर्जा की ओर ले जाने का यह ऐतिहासिक बदलाव झारखंड, छत्तीसगढ़, ओड़ीशा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों के लिए एक नया वित्तीय और सामाजिक संकट खड़ा कर रहा है। गौरतलब है कि भारत ने 2070 तक ‘नेट-जीरो’ उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है। देश की कुल बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी 52 फीसदी तक पहुंच चुकी है, लेकिन वास्तविक धरातल पर ग्रिड की तैयारियों और भंडारण की कमी के कारण इसमें से केवल 29 फीसदी बिजली ही वास्तव में पैदा हो पा रही है। नवीकरणीय ऊर्जा के इस विकास का लाभ देश के कुछ ही हिस्सों तक सीमित है। राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्य धूप और हवा की प्रचुरता के कारण आगे निकल रहे हैं, जबकि पूर्वी और मध्य भारत के कोयला उत्पादक राज्य इस बदलाव में पिछड़ रहे हैं।

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