सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने एक बयान में कहा है कि तानाशाही उस समाज में पनपती है जहां लोग सवाल पूछने से डरते हैं। मेघालय की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी परंपराओं पर सवाल नहीं उठाता, वह अन्यायपूर्ण प्रथाओं को सुधारने में नाकाम रहता है। मनमानी सत्ता हमेशा डर और बिना परखे विश्वासों के सहारे फलती-फूलती है। संविधान के अनुच्छेद 51 ए का हवाला देते हुए उन्होंने नागरिकों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया। इसका अर्थ केवल वैज्ञानिक ज्ञान पाना नहीं, बल्कि तर्क के आधार पर सोचना, परखना और सुधार करना है। यही सोच कानून के शासन की असली नींव रखती है। जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने स्वस्थ बहस की वकालत करते हुए कहा कि सवाल पूछने वालों को दूसरों के विचार सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। सार्थक चर्चा तभी संभव है जब लोगों के पास सही जानकारी की पहुंच हो। एक मजबूत लोकतंत्र के लिए जनता द्वारा निरंतर सवाल पूछना और चीजों की जांच-परख करना बेहद जरूरी है।
02/11/2026
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